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शुआट्सः फीस के रुपए मुकदमे और लग्जरी में खर्च किए, ट्रेजरी खाली, अब सैलरी देने के पैसे नहीं

SV News

नैनी, प्रयागराज (केएन शुक्ल घंटी)। सैम हिगिन्नबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज में पिछले कई महीनों से शिक्षकों और बच्चों का प्रदर्शन चल रहा है। एक ओर शिक्षक 11 महीने से सैलरी नहीं मिलने से परेशान हैं। दूसरी ओर मोटी फीस देने वाले हजारों स्टूडेंट्स का करियर दांव पर लगा है।
पड़ताल में इसकी वजह खराब वित्तीय प्रबंधन, कुलपति, प्रति कुलपति व तमाम प्रशासनिक अधिकारियों के ऊपर दर्ज मुकदमे, फीस के रुपए से केस लड़ने और लाइफ स्टाइल पर खर्च करना बताया जा रहा है।
शुआट्स से रिटायर्ड प्रो. डॉ. सुब्रत सिंह का कहना है, ष्आरबी लाल खुद व अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए खुद को मानदेय देते हैं। करोड़ों रुपए ऐसे ही खर्च कर दिए। आरबी लाल खुद के वेतन से चार गुना ज्यादा करीब एक करोड़ रुपए मानदेय देते हैं। जब शिकायत की गई तो स्पेशल अलाउंस के नाम पर करोड़ों रुपए लिए।
उन्होंने बताया, राज्य सरकार का नियम है कि यदि कर्मचारी किसी आपराधिक काम में शामिल पाया जाता है और जेल जाता है तो वह सस्पेंड माना जाएगा। शुआट्स ने सस्पेंशन नियामावली में अपनी सुविधा से बदलाव कर लिया।
उन्होंने बताया, ष्बदलाव में नियम बनाया गया कि यदि यूनिवर्सिटी अधिकारी यह पाते हैं कि गिरफ्तारी दुर्भावना से हुई थी तब यूनिवर्सिटी इसका मुकदमा लड़ेगी। इसके बाद करोड़ों रुपए खुद के मुकदमे में खर्च किए।
विनोद बी लाल, एसबी लाल, मुहम्मद इम्तियाज, रमाकांत दुबे, सर्वजीत हरबर्ट, अशोक सिंह, स्टीफन दास जैसे रिटायर्ड कर्मचारियों के ऊपर दर्ज निजी मुकदमे को भी यूनिवर्सिटी को मिलने वाले फीस से लड़े जा रहे हैं। यही कारण है कि यूनिवर्सिटी की फीस कोष में नहीं जमा हो पाती और कोष खाली रहता है।
विनोद बी लाल 307 और रेप के मामले में गिरफ्तार है, सर्वजीत हरबर्ट और अशोक सिंह अवैध नियुक्ति और वित्तीय अनियमितता के केस में अरेस्ट हैं। मुहम्मद इम्तियाज फतेहपुर में दर्ज धर्मांतरण केस में गिरफ्तार थे और अभी जमानत पर हैं। हमीरपुर में दर्ज रेप केस में फरार चल रहे हैं। कुलपति आरबी लाल के ऊपर 30 से अधिक केस दर्ज हैं और वह फरार चल रहा है। प्रति कुलपति विनोद बी लाल पर 43 केस दर्ज हैं और वह भी फरार चल रहा हैं।
सैम हिग्गिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसेस नैनी नियम विरुद्ध हो रही नियुक्तियों के खिलाफ त्ज्प् एक्टिविस्ट दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसकी जांच कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग यूपी की ओर से की गई।
24 अक्टूबर 2018 व 23 जनवरी 2019 के क्रम में निदेशक स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग यूपी से भी जांच कराई गई। इसमें संस्थान में वर्ष 1984 से लेकर 2017 के बीच कुल 69 प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत पाई गई।
2 फरवरी 2023 को स्पेशल टास्क फोर्स के डिप्टी एसपी नावेंदु सिंह ने शुआटस के कुलपति समेत 12 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में दो एफआइआर दर्ज कराई थी।
सरकार की ओर से मिली राशि का वेतन समेत अन्य मद में किए गए दुरुपयोग से संबंधित है। इसमें 5, 56,57,592 रुपए के अनियमित भुगतान एवं आपराधिक दुरुपयोग का मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह एफआईआर नैनी कोतवाली में गुरुवार की शाम दर्ज कराई गई है।
इसी साल फरवरी में स्पेशल टॉस्क फोर्स के एएसपी नवेंदु सिंह ने यह मुकदमा नैनी थाने में शुआट्स के कुल 11 अफसरों, कर्मचारियों को नामजद कराते हुए लिखवाया था। इसमें 5.56 करोड़ के गबन का आरोप लगाया गया था।
मुकदमे का आधार डायरेक्टर, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की उस रिपोर्ट को बनाया गया था जो कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के आदेश पर की गई जांच के बाद तैयार की गई थी। इसके मुताबिक, शुआट्स में कुलपति, कुलाधिपति व विश्वविद्यालय के अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने शासन से विभिन्न मदों में दिए गए 5.56 करोड़ से अधिक धन का गबन कर लिया था।
विभिन्न बैंक खातों से जाली दस्तावेजों के जरिए ये रुपए ठिकाने लगाए गए। विवेचना के दौरान सभी आरोप सही पाए गए और पुलिस ने 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
कुलपति डॉ. राजेंद्र बिहारी लाल, कुलाधिपति जेए ऑलिवर, तत्कालीन रजिस्ट्रार अजय कुमार लॉरेंस, प्रतिकुलपति सुनील बी. लाल, तत्कालीन निदेशक एचआरएम विनोद बिहारी लाल, रजिस्ट्रार रॉबिन एल प्रसाद, तत्कालीन वित्त निदेशक/वित्त नियंत्रक स्टीफेन दास, प्रति कुलपति डॉ. सर्वजीत हर्बट, तत्कालीन निदेशक एचआरएम रंजन ए जॉन और कार्यालय अधीक्षक अशोक सिंह शामिल हैं।
डिपार्टमेंट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी के डॉ. आरएन शुक्ला ने बताया, हम जैसे सैकड़ों शिक्षकों को लंबे समय से वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने से शिक्षक और उनके परिवार भुखमरी की कगार पर हैं। हम बच्चों की फीस और अपनी ईएमआई नहीं जमा कर पा रहे हैं। हमारी हालत बहुत खराब है।
डॉ. अजय कुमार सिंह का कहना है, सभी अथॉरिटी फरार हैं। पिछले डेढ़ साल से दो महीने से कम अपनी कुर्सी पर बैठकर काम कर पाए हैं। सारा काम करने का अधिकारी अपने किसी चहेते को दे देते हैं। इसके बाद खुद अथॉरिटी के रूप में प्रशासन चलाते रहे हैं। सारा पैसा अपने निजी फायदे में खर्च करते हैं।

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