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संसार में प्रभु श्रीराम के अलावा कोई नहीं है निर्दोष : स्वामी स्वरूपाचार्य

 

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मेजा, प्रयागराज (विमल पाण्डेय)। श्री सिद्ध हनुमान मन्दिर पांती, मेजारोड में चित्रकूट धाम से पधारे जगदगुरु रामानन्दाचार्य कामदगिरि पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामस्वरुपाचार्य जी महाराज पूज्य ने कथा के छठवे दिवस की कथा मे बताया की राम को यदि मर्यादा पुरुषोत्तम एवं जन जन के हृदय में राम को पहुंचाने का काम किया तो ओ माँ कैकेई है। आम जन मानस कहते हैं की कैकई भरत के लिए राम को वन भेज दी लेकिन राम को वन भेजने का मतलब है। राम को आत्मा रामो विराजते बन..गोस्वामी जी कहते हैं। सुनहु ब्रानप्रिय देहु एक वर भरत, दूसर बर मांगहु कर जोरी पुरवहु नाथ मनोरथ मोरी रामवरूपाचार्य महाराज तापस वेस विषेस उदासी चौदह वरिस. राम बनवासी इसका तात्पर्य-राम यदि भवन मे रहेंगे तो केवल राम होकर रह जायेंगे और यदि राम वन चले जायेंगे तो राम विश्व व्यापी राम कहलायेंगे। इसीलिये राम वन जाये।

श्रीराम की कथा के प्रभाव से कलुषित मन पवित्र हो जाते हैं। यहां प्रभु श्रीराम के अलावा कोई निर्दोष नहीं है। मनुष्य के दोष दूर करने का एक ही रास्ता राम कथा ही है।

मानस प्रचारिणी समिति द्वारा आयोजित 57वें विराट मानस सत्संग समारोह में मानस मर्मज्ञों, संतों का जमावड़ा है। स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कथा विस्तार में कथा प्रेमियों को राम कथा के जीवन पर प्रभाव और कथा श्रवण से जीव कल्याण की विशद व्याख्या की है।

उन्होंने कहा कि बदलते दौर में विकास और विनाश के साथ उत्कर्ष

और अपकर्ष को देखा गया है। मानव जीवन कितना ही शिखर पर पहुंच जाय, लेकिन उसका कल्याण श्रीराम कथा और भगवत भजन में ही निहित है।

उन्होंने कहा कि कोई साधु, संत हों या आम लोग हों, सब में कोई न कोई दोष है। निर्दोष तो सिर्फ प्रभु श्रीराम ही हैं।

मानस प्रचारिणी समिति के सचिव विजयानन्द उपाध्याय ने सत्संग समारोह मंच पर स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज का गुरु परम्परा के रूप में सम्मान किया। पांती में चल रहे 57वें सत्संग समारोह पर चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि सोचिए जब यह कथा सत्संग शुरू किया गया होगा। समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। जरूरत है श्रीराम कथा को आत्मसात कर जीवन को सार्थक बनाएं।

सत्संग समारोह के आयोजक एवं मानस प्रचारिणी समिति के अध्यक्ष नित्यानंद उपाध्याय ने सभी कथा प्रेमियों से सत्संग से जुड़ने के लिए आग्रह किया है।

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