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रेखा सरकार के सामने चुनौतियों का अंबार

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भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि वह दिल्ली की कभी लाइफ लाइन रही यमुना की सफाई कराएगी। पार्टी ने नदी को स्वच्छ बनाने के साथ ही उसके सौंदर्यीकरण का भी वादा किया था। नदी सफाई का काम शुरू हो चुका है...

हर दौर में राजनीति के केंद्र में कुछ ही मुद्दे होते हैं, जिनके इर्द-गिर्द ही पूरी राजनीति चलती है और उन्हीं को ध्यान में रखते हुए कदम भी उठाती है। इसे राजनीति का युगबोध  भी कह सकते हैं। मौजूदा राजनीति के केंद्र में दलित, पिछड़ा और महिलाओं से जुड़े मुद्दे ही हैं। शायद इसी वजह से बीजेपी पर उसके विरोधी आरोप लगाते रहते थे कि वह महिलाओं की बात तो खूब करती है, लेकिन उसके पास कोई महिला मुख्यमंत्री नहीं है। विरोधियों के आरोप को इससे भी दम मिलता था कि देश के 19 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों  में बीजेपी की सरकारें हैं। फिर बीजेपी महिला सम्मान और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं की बात भी खूब करती है। दिल्ली की जनता ने जब 27 साल के अंतराल के बाद बीजेपी को सत्ता सौंपी, तभी तकरीबन तय हो गया कि दिल्ली को इस बार महिला मुख्यमंत्री मिल सकती है। इस दौड़ में रेखा गुप्ता आगे निकल गईं और अब दिल्ली की कमान उनके हाथ है।

रेखा गुप्ता को देश की राजधानी की कमान तो मिल गई है, लेकिन उनके लिए राजधानी की सत्ता फूलों की सेज नहीं है, बल्कि कांटों भरी राह है। उनके सामने चुनौतियां ही चुनौतियां हैं। मोटे तौर पर अगर विचार करें तो उन पर यमुना की सफाई कराने, राजधानी को स्वच्छ वातावरण मुहैया कराने के साथ ही महिला सम्मन निधी देने, मुफ्त की सुविधाएं जारी रखने,  और राज्य का स्वास्थ्य ढांचा बेहतर बनाने का दबाव ज्यादा रहेगा। बीजेपी ने केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार और शीश महल को बड़ा मुद्दा बनाया था, इसलिए रेखा गुप्ता सरकार के सामने दिल्ली में स्वच्छ प्रशासन देना भी बड़ी चुनौती होगी और इसके जरिए उन्हें अरविंद केजरीवाल के सामने बड़ी लकीर खींचनी होगी। रेखा गुप्ता राजधानी दिल्ली की राजनीति में मौजूद बीजेपी दिग्गजों के सामने जूनियर भी हैं। इसलिए वरिष्ठ नेताओं से समन्वय बनाने और उनके सहयोग से संगठन को भी आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी रहेगी।

भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि वह दिल्ली की कभी लाइफ लाइन रही यमुना की सफाई कराएगी। पार्टी ने नदी को स्वच्छ बनाने के साथ ही उसके सौंदर्यीकरण का भी वादा किया था। नदी सफाई का काम शुरू हो चुका है। लेकिन नदी में गिरने वाले नालों के पानी को साफ करने की अभी तक कोई ठोस योजना शुरू नहीं हुई है। चूंकि बीजेपी का एक उद्देश्य यमुना के पानी को पवित्र बनाना भी है, लिहाजा उसे इस दिशा में ठोस पहल करनी ही होगी। दिल्ली की सरकार में अघोषित तौर पर नंबर दो की हैसियर रखने और केजरीवाल को चुनावी चौसर पर मात देने वाले प्रवेश वर्मा चुनाव अभियान के आखिरी दौर में केजरीवाल की होर्डिंग को यमुना में डुबाकर दिल्ली के सामने यमुना की गंदगी को मुद्दा बना चुके हैं। लिहाजा यमुना की सफाई के लिए रेखा गुप्ता सरकार को प्राणपण से लगना होगा। अगर एक खास अवधि में यमुना साफ होती नहीं दिखी तो आंदोलन से उभरी केजरीवाल राजनीति इसे मुद्दा बनाकर रेखा गुप्ता सरकार की नाक में दम करने से नहीं चूकेगी। वैसे भी दिल्ली में करीब पैंतीस फीसद तक हिस्सेदार हो चुकी पूर्वांचली जनसंख्या का लोक पर्व छठ पानी के ही किनारे मनाया जाता है। अगर साल-दो साल बाद उसे साफ यमुना नहीं मिली तो उसका मन बदल सकता है। कहना न होगा कि इस जनसंख्या ने इस बार बीजेपी पर भरोसा ज्यादा जताया है। 

दिल्ली की नवेली रेखा सरकार पर राजधानी में स्वच्छ हवा और वातावरण मुहैया कराने की भी बड़ी चुनौती है। वैसे भी वायु प्रदूषण के मामले में दिल्ली की हालत देश में सबसे खराब है। सर्दी के मौसम में कई साल से यहां सामान्य सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। पूरी राजधानी धूल और धुएं के चादर से ढंक जाती है। अरविंद और बाद में आतिशी सरकार पर आरोप रहा कि राजधानी दिल्ली के लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा तक नहीं मुहैया नहीं करा सकी। अब रेखा गुप्ता सरकार पर जिम्मेदारी है कि वह राजधानी दिल्ली को स्वच्छ हवा और वातावरण मुहैया कराए। उन्हें वायु प्रदूषण हर हाल में कम करना ही होगा। 

बीजेपी ने विधान सभा चुनाव के वक्त इस बात की गारंटी दी थी कि केजरीवाल सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं को बंद नहीं करेगी। उसने तो केजरीवाल सरकार की दो सौ यूनिट की बजाय तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने, मुफ्त पानी मुहैया कराने और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने का वादा भी किया था। इस दिशा में रेखा सरकार को तेजी से काम करना होगा, अन्यथा मुफ्त की आदत वाली जनता का मन बदलते देर नहीं लगेगी। चुनाव अभियान के दौरान बीजेपी ने दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए देने का वादा किया था, जो केजरीवाल की पार्टी के 2100 रूपए महीने के वायदे से ज्यादा है। महिलाएं आज की राजनीति की धुरी बनती जा रही हैं। बीजेपी और रेखा गुप्ता सरकार पर दबाव रहेगा कि वह महिलाओं के लिए सम्माननिधि की घोषणा ना सिर्फ जल्द करे, बल्कि उसे सुचारू तरीके से लागू भी करे। 

केजरीवाल सरकार द्वारा बहुप्रचारित स्वास्थ्य और शिक्षा मॉडल के खोखलेपन को भी बीजेपी ने मुद्दा बनाया था। रेखा सरकार के सामने दिल्ली की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने के साथ ही स्वास्थ्य सेवा के प्रति लोगों में भरोसा बहाल करने और बेहतर सुविधा मुहैया कराने का दबाव रहेगा। वैसे भी दिल्ली के सरकारी अस्पतालों पर दूसरे राज्यों के मरीजों के इलाज का दबाव ज्यादा रहता है। लिहाजा रेखा सरकार पर अस्पतालों की लंबित परियोजनाएं पूरा करना और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की संख्या बढ़ाने की चुनौती है। दिल्ली के बड़े सरकारी अस्पतालों की ओपीडी, दवा काउंटर पर मरीज घंटों कतार में लगने को मजबूर हैं। जांच व इलाज में वेटिंग बड़ी समस्या है। इसकी वजह यह है कि दिल्ली के सरकारी अस्पताल डॉक्टर, नर्सिंग व पैरामेडिकल कर्मियों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा गठित कमेटी भी अपनी रिपोर्ट में इन समस्याओं को उठा चुकी है। दिल्ली में 24 अस्पतालों की परियोजनाएं लंबित हैं। इनमें सात आईसीयू अस्पताल, चार नए अस्पताल और 13 वर्तमान अस्पतालों की विस्तार परियोजनाएं शामिल हैं। ये परियोजनाएं पूरी होने पर दिल्ली सरकार के अस्पतालों में 16,186 बेड बढ़ जाएंगे। विधानसभा की पहली कार्यवाही बैठक में यह सवाल भी उठ चुका है। आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के छह अस्पतालों का निर्माण कार्य 90 से 99 प्रतिशत और चार अस्पतालों का निर्माण कार्य 80 से 89 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। वैसे भी दिल्ली के स्वास्थ्य  बजट का बड़ा हिस्सा अस्पतालों के संचालन व वेतन पर खर्च होता। लिहाजा स्वास्थ्य परियोजनाओं के लिए आवश्यक बजट जुटाना नई सरकार के लिए चुनौती है। 

दिल्ली में देश के किसी भी राज्य या शहर की तुलना में सबसे ज्यादा गाड़ियां हैं। इसकी वजह से सड़क हादसे भी यहां खूब होते हैं। दिल्ली सरकार को जहां सड़कों के निर्माण पर काम करना होगा, वहीं सार्वजनिक परिवहन सुविधा बढ़ानी होगी। इस बीच दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े में शामिल दो हजार क्लस्टर बसों की मियांद पूरी होने वाली है। अगर ये बसें सड़कों से हटीं तो दिक्कतें बढ़ जाएंगी। इसका भी रेखा सरकार को ध्यान रखना होगा। इसके साथ ही सड़क हादसा पीड़ितों के इलाज के लिए दिल्ली में मौजूद दो ट्रामा सेंटरों की संख्या बढ़ानी होगी। 

दिल्ली के लोगों को नजदीक ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में दिल्ली के लिए पीएम आयुष्मान भारत इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन स्कीम (पीएम एबीएचआइएम) के तहत 2406.77 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति दी थी। जिसे आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने लागू नहीं किया। हालांकि अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में रेखा सरकार ने आयुष्मान योजना को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बीमा कवर पांच लाख से बढ़ाकर दस लाख कर दिया है। लेकिन आयुष्मान योजना के तहत जो 1,139 अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 11 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य लैब व नौ क्रिटिकल केयर सेंटर बनाए जाने हैं, उन पर तेजी से काम करना होगा। 

दिल्ली की बीजेपी राजनीति में तमाम दिग्गज शामिल हैं। रेखा उनकी तुलना में जूनियर हैं। फिर वे पहली बार विधायक चुनी गई हैं। चूंकि उन्हें आलाकमान ने नियुक्त किया है, लिहाजा उनके खिलाफ खुलकर कोई शायद ही सामने आए, लेकिन दिग्गजों का अघोषित सहयोग और उनकी बेरूखी का सामना रेखा गुप्ता को करना पड़ सकता है। इसलिए उनके सामने अपने वरिष्ठ  नेताओं से बेहतर समन्वय स्थापित करने की चुनौती भी होगी और सरकार के साथ ही संगठन के कामकाज में उन्हें अपना सहयोगी बनाना होगा। रेखा गुप्ता के पहले आतिशी भले ही मुख्यमंत्री रही हों, लेकिन उन्हें खड़ाऊं मुख्यमंत्री ही माना गया। अरविंद केजरीवाल को ही असली मुख्यमंत्री माना जाता रहा। केजरीवाल चूंकि देशव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति से उभरे हैं। लिहाजा उनकी छवि और कद बड़ा हो गया। रेखा गुप्ता जो भी काम करेंगी, उन कार्यों को लेकर उनकी तुलना अरविंद केजरीवाल से होगी। अगर वे सफल होती हैं तो वे बीजेपी के मूल वोटरों को तो पार्टी संगठन के साथ जोड़े रखेंगी, और केजरीवाल के मजबूत वोटर आधार बन चुके लोगों को भी अपनी ओर खींच सकती हैं। अगर वह ऐसा करने में नाकाम रहीं, तो फिर केजरीवाल के संगठन के हाथ आसान हथियार होगा।

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