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हिंदू लड़कियों को डंडे से समझाने की जरूरतः हर्षा रिछारिया

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। संगम में स्नान करके श्रद्धालु लौट रहे हैं। सामने 3 लोग चार्ट लेकर खड़े हैं। किसी में लिखा है- अपनी बेटी को लव जिहाद से बचाओ तो किसी में लिखा है कब तक हिंदू कटता रहेगा? ये बैनर लेकर खड़े लोग कहते हैं कि लोगों को हम लव जिहाद को लेकर जागरूक कर रहे। बात सिर्फ इतनी नहीं, पूरे मेले में लव जिहाद को लेकर चर्चा है। कहीं नागा साधु तो कहीं शंकराचार्य इस मामले में खुलकर बोल रहे।

मेले में आईं हर्षा रिछारिया ने तो यह तक कह दिया कि अभी हिंदू अपनी लड़कियों को बातों से समझा रहे थे। अब अगर डंडे की जरूरत पड़े तो डंडे से समझाओ। आखिर क्यों वह किसी अब्दुल के चक्कर में पड़ें? सूरज वार्ता ने लव जिहाद की बातों को लेकर माघ मेले में अलग-अलग लोगों से बात की। जो कुछ निकलकर आया है, वह कई मायनों में गंभीर सवाल खड़ा करता है। लव जिहाद के खिलाफ युवा और साधु-संत मुखर हो रहे। प्रयागराज मेले के दौरान लोगों को जागरूक किया जा रहा। लव जिहाद के खिलाफ युवा और साधु-संत मुखर हो रहे। प्रयागराज मेले के दौरान लोगों को जागरूक किया जा रहा।

बैनर लेकर संगम पर खड़े, पुलिस हटा रही

प्रयागराज में 3 जनवरी से माघ मेला शुरू हुआ। हर दिन लाखों लोग संगम में स्नान कर रहे। यहां किसी भी चीज का प्रचार करने वाले यह मानते हैं कि ढंग से बात पहुंचाई जाए, तो करोड़ों लोगों तक आसानी से पहुंचाई जा सकती है।

इसी सोच के साथ विपिन सिंह, शिवांगी और नवीन संगम में आ गए। ये लोग लव जिहाद को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे। पहले ये बैनर लेकर संगम घाट के पास खड़े थे। लेकिन, वहां से पुलिस ने इन्हें हटने को बोल दिया। इसके बाद ये लोग वापसी मार्ग पर आकर खड़े हो गए।

विपिन से हमने पूछा, इन सबकी जरूरत क्यों? विपिन कहते हैं- देश में लव जिहाद की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। देश के हर कोने से हर दिन इस तरह की घटनाएं सामने आ रहीं। पैटर्न एक जैसा है। कहीं भी देखेंगे तो ऐसा ही नजारा दिख जाएगा। अगर आज हम सब नहीं बोले तो आगे बहुत नुकसान हो जाएगा। विपिन के हाथ में जो बैनर है, उस पर लिखा है- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। बेटी बचेगी, तभी तो पढ़ेगी। पहले अपनी बेटी को लव जिहाद से बचाओ।

पहले मेल-जोल बढ़ाएगा, फिर बंदिशें लगाएगा

प्रयागराज की शिवांगी शर्मा भी हाथ में बैनर लेकर खड़ी हैं। कहती हैं- हम दिल्ली में रहते हैं, पिछले एक महीने से प्रयागराज में हैं। लव जिहाद के मामले में सबसे बड़ी गलती तो हिंदू लड़की की ही होती है। उसे समझना होगा कि वह ऐसे लोगों से न मिले, न मेल-जोल रखे।

पहले वह मीठी-मीठी बातें करेगा, लेकिन बाद में वह आपको फंसा लेगा। फिर कहेगा कि तुम ये नहीं कर सकती, तुम वो नहीं कर सकती। अगर तुमने इन चीजों को लेकर मना किया, फिर वह मार देगा। लड़कियों को इससे दूर रहना पड़ेगा।

विपिन के तीसरे साथी नवीन सिंह ने जो बैनर पकड़ा है, वह बाकी दो से अलग है। उसमें लिखा है- हिंदू एक किन बातों में? कब तक हिंदू कटता रहेगा? कब तक कश्मीर में, आज कट रहा बंगाल में? अब आगे कहां कटेगा हिंदू? जय श्रीराम।

नवीन कहते हैं- हम किसी पार्टी या फिर संगठन से नहीं जुड़े हैं। हमारा मकसद बस लोगों को जागरूक करने का है। आए दिन हिंदू मर रहा है। बांग्लादेश और पाकिस्तान का हाल आप खुद देख लीजिए। वहां हिंदू भगाओ-देश बचाओ जैसी मुहिम चल रही। दिल्ली में ब्लास्ट हो रहा। पहले कहते थे कि पढ़े-लिखे नहीं, जबकि अब तो बहुत ज्यादा पढ़े लिखे भी इस काम में शामिल हैं।

शंकराचार्य बोले- लव जिहाद मतलब मानव तस्करी

न सिर्फ पोस्टर-बैनर, बल्कि साधु-संतों और शंकराचार्य के बीच भी लव जिहाद बड़ा मुद्दा बना है। वाराणसी के सुमेर पीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती कहते हैं- लव जिहाद एक तरह से मानव तस्करी का मामला है।

10-11 लाख हिंदू लड़कियों को किडनैप किया गया और फिर विदेश में बेच दिया गया। जो लोग ऐसा कर रहे, उनकी संपत्ति जब्त होनी चाहिए। आजीवन कारावास की सजा होना चाहिए। दुष्टों के साथ दुष्टता जरूरी है। अगर इनके साथ सख्ती से नहीं निपटा गया तो खतरनाक होगा।

श्री पंचदशनाम आह्वान अखाड़ा के नागा साधु महंत चेतन गिरि भी मेले में आए हैं। लव जिहाद को लेकर वह कहते हैं- हमारी कन्याएं नाजुक हैं, कोई भी उन्हें बहला-फुसला सकता है। हिंदू भी गाय की तरह है, लेकिन जब बिगड़ता है तो वह शेर की तरह हो जाता है। दूसरे धर्म को लेकर बिगाड़ने की नौबत कर रहे हैं। ये हमें काफिर बोलते हैं। लेकिन समझ लें कि अगर हम काफिरताई पर आ गए तो ये बच नहीं पाएंगे।

हर्षा बोलीं- लड़कियों को अब डंडे से सुधारने की जरूरत

महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया भी इस वक्त मेले में हैं। लव जिहाद को लेकर वह मुखर हैं। कहती हैं- लव जिहाद के खिलाफ हमारी युवा पीढ़ी, खासकर लड़कियों को समझाने की जरूरत है। जागरूक करने की जरूरत है।

मेरा अपना विचार है कि जब बच्चा कमाने लग जाए। नाम बनाना सीख जाए, सोशल मीडिया चलाना सीख जाए तो उसे इतना को ज्ञान हो जाता है कि क्या सही और क्या गलत है। लेकिन, इसके बावजूद किसी अब्दुल के चक्कर में पड़ते हो तो गलत आप हो।

हर्षा आगे कहती हैं- इस वक्त जितने भी केस आ रहे, वह किसी से छुपे नहीं। कितनी ही बेटियों को टारगेट किया जा रहा, ये सबके सामने हैं। हर दिन ही कहीं न कहीं से केस सामने आ रहे। कुछ कमियां तो हमारी बेटियों में भी है। अब अगर वह इतना कुछ होने के बाद भी नहीं समझ रही हैं तो उन्हें डंडे से समझाने की जरूरत है। क्योंकि, मुंह से समझाना बहुत हो गया। सामने वाले को तो हम समझा ही रहे हैं, अब बेटियों को भी समझाने की जरूरत है।

लव जिहाद के इस मामले पर हमारी बात तेज बहादुर सप्रू हॉस्पिटल के आई सर्जन केके मिश्रा से हुई। वह कहते हैं- लव जिहाद उन अर्थों में गलत है, जब प्रेम न करके धर्म विशेष पर ही नजर रखना हो और लड़कियां ग्रहण करना हो। अगर ऐसा है तो हम इसे लव जिहाद की श्रेणी में ले आएं। लेकिन अगर सचमुच कोई प्रेम कर रहा, प्रेम को ही सर्वाेपरि मान रहा तो ऐसे प्रेम पर रोक नहीं लगाना चाहिए। लेकिन अगर मार दे रहे हैं, तो फिर प्रेम कैसा?

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