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सांस्कृतिक चेतना शक्ति: लोक नृत्य, भजन प्रस्तुतियों से बटोरीं तालियां

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प्रयागराज के सांस्कृतिक उत्सव में बच्चों ने बिखेरे जलवे

प्रयागराज (राजेश सिंह)। सांस्कृतिक चेतना शक्ति (विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत) की ओर से रामनवमी उत्सव में रविवार को सारस्वत सभागार लूकरगंज में भव्य एवं प्रेरणादायी सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. प्रदीप कुमार चित्रांशी और उनकी पत्नी ज्योति चित्रांशी की अध्यक्षता में हुआ।

सांस्कृतिक चेतना शक्ति की अध्यक्ष पूनम तिवारी एवं जिलाध्यक्ष प्रीति श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में लोक नृत्य, भजन, कविता, चित्रकला एवं नवदुर्गा वेशभूषा जैसी विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांस्कृतिक भावों को सजीव किया

आरोही श्रीवास्तव, शगुन तिवारी, समृद्धि तिवारी, शनाया तिवारी, अंशिका सिंह, दक्षिता भट्ट, आस्था पाण्डेय, ईशानवी, ज्योति कुमारी आनंद सहित अनेक प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट नृत्य प्रस्तुत किया। देवांश तिवारी, आराध्या सिंह, पीयूषा सिंह एवं धनुष सिंह ने झाँकी के माध्यम से सांस्कृतिक भावों को सजीव किया।

ज्योति त्रिपाठी एवं पूजा संकल्प ने कविता व लेखन से सराहना प्राप्त की, जबकि अंतरा श्रीवास्तव, आशीष आर्या एवं पूर्वी कुमारी आनंद ने भजन व गायन से भक्ति रस का संचार किया। अनमोल विश्वकर्मा ने ढोलक वादन से कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार किया।

बच्चियों की प्रभावशाली प्रस्तुति

विशेष रूप से प्रतापगढ़ (कुंडा) से आई प्रतिभागी बच्चियों ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, जो जिला प्रभारी पूजा संकल्प के संरक्षण में सम्मिलित हुईं। कार्यक्रम का संचालन संध्या कनौजिया (अध्यक्ष, युवा चेतना शक्ति) द्वारा अत्यंत उत्कृष्ट एवं प्रभावशाली ढंग से किया गया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रदीप कुमार चित्रांशी ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि “बच्चों की प्रतिभा और संस्कारों का यह संगम अत्यंत प्रेरणादायी है। ऐसे आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।”

डॉ. राहुल शुक्ल ‘साहिल’ (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) ने कहा “सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलना अत्यंत आवश्यक है।” साकिब सिद्धिकी ‘बादल’ (प्रदेश अध्यक्ष) ने अपने संबोधन में कहा कि “संगठन की शक्ति और समर्पण से ही ऐसे भव्य आयोजन संभव होते हैं, जो समाज में सांस्कृतिक चेतना को जागृत करते हैं।”

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