बलिया (राजेश सिंह)। पुलिस की छवि को एक बार फिर शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। बलिया जिले के उभांव थाने में तैनात रहे क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक को एक पीड़िता के साथ अभद्र और अशोभनीय बातचीत करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामला इतना गंभीर है कि इसमें न केवल पद का दुरुपयोग किया गया, बल्कि न्याय की गुहार लगाने वाली एक महिला की अस्मत से खिलवाड़ करने की कोशिश की गई।
यह पूरा प्रकरण एक वन दरोगा के खिलाफ दर्ज यौन शोषण के मामले से जुड़ा है। पीड़िता का आरोप था कि वन दरोगा ने शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया। बड़ी मशक्कत और दबाव के बाद उभांव थाने में मुकदमा तो दर्ज हो गया, लेकिन असली खेल चार्जशीट लगाने के नाम पर शुरू हुआ।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। इस ऑडियो में इंस्पेक्टर नरेश मलिक पीड़िता पर केस में चार्जशीट लगाने के बदले 'अकेले में मिलने' का गंदा दबाव बनाते हुए सुने जा सकते हैं।
ऑडियो में इंस्पेक्टर की भाषा न केवल अमर्यादित है, बल्कि वह पुलिसिया रौब दिखाते हुए महिला को सौदेबाजी के लिए मजबूर कर रहा है। बातचीत के दौरान पीड़िता ने यह भी सनसनीखेज दावा किया कि थाने के प्रभारी संजय शुक्ला ने भी उसके सामने कुछ इसी तरह की 'शर्तें' रखी थीं।
खबर के मीडिया में प्रमुखता से आने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया। आजमगढ़ डीआईजी के निर्देश पर एसपी बलिया ओमवीर सिंह ने सीओ रसड़ा को जांच सौंपी। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने पर इंस्पेक्टर नरेश मलिक को सस्पेंड कर दिया गया।
थानेदार पर जांच: थाना प्रभारी संजय शुक्ला की भूमिका भी अब जांच के घेरे में है। सीओ रसड़ा उनकी भी कुंडली खंगाल रहे हैं।
साइबर सेल से छुट्टी: बताया जा रहा है कि नरेश मलिक को कुछ दिन पहले ही थाने से हटाकर साइबर सेल भेजा गया था, लेकिन उनके कारनामों ने वहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा।
इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए एसपी ओमवीर सिंह ने कहा.
पुलिस बल में अनुशासनहीनता और अनैतिक आचरण के लिए कोई जगह नहीं है। इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। थाना प्रभारी के खिलाफ भी जांच जारी है, रिपोर्ट आते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी न्याय के लिए कहां जाए? एक तरफ सरकार महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ नरेश मलिक जैसे अधिकारी खाकी की मर्यादा को तार-तार कर रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल निलंबन काफी नहीं, बल्कि कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई दूसरा अधिकारी ऐसी हिम्मत न कर सके।
