सर्गियो गोर को दिल्ली भेजने पर ट्रंप की घोषणा ने दिए संकेत
नई दिल्ली। सर्गियो गोर भारत में अमेरिका के नये राजदूत के तौर पर नामित किये गये हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को तड़के अपने सोशल मीडिया के जरिए इस बात की जानकारी दी। गोर राष्ट्रपति ट्रंप के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक हैं जिन्होंने “मेक अमेरिका ग्रेट एगेन” (मागा) कार्यक्रम को स्थापित करने व इसे आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। गोर को भारत के राजदूत के साथ ही अमेरिका के दक्षिण एशिया व केंद्रीय एशिया के विशेष दूत के तौर पर भी नामित किया गया है।
पहली बार अमेरिकी सरकार ने नया पद सृजित किया
पहली बार अमेरिकी सरकार ने इस तरह का नया पद सृजित किया है और उसका केंद्र नई दिल्ली में रखा है। यह बताता है कि आने वाले वर्षों में अमेरिका की एशिया नीति की गितिविधियों का केंद्र नई दिल्ली हो सकता है लेकिन शायद यह बात भारत पसंद नहीं आये।
भारत में अमेरिकी राजदूत का पद जनवरी, 2025 से खाली पड़ा है और इस दौरान जिस तरह से ट्रंप की शुल्क नीति को लेकर भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव पसरा है, उसे देखते हुए नए राजदूत की भूमिका को अहम माना जा रहा है। जानकार मान रहे हैं कि गोर को नियुक्त करके ट्रंप ने भारत केंद्रित अमेरिका की नीति को बदलने का संकेत दिया है।
अभी गोर को नामित करने के लिए जो संदेश राष्ट्रपति संदेश ने सोशल मीडिया पर डाला है, उसकी भाषा को लेकर कूटनीतिक सर्किल में चर्चा शुरू हो गई है। अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति या अन्य वरिष्ठ अधिकारी जब भारत का किसी बात का जिक्र करते रहे हैं तो उसे एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के तौर पर चिन्हित करते हैं लेकिन ट्रंप ने लिखा है कि गोर को दुनिया के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले हिस्से में राजदूत बनाया जा रहा है।
ट्रंप ने लिखा है,
दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले इलाके में यह मेरे लिए महत्वपूर्ण है कि किसी ऐसे आदमी को अपना एजेंडा लागू करने और “मागा” में मदद करने के लिए नियुक्त करूं जिस पर मैं पूरा भरोसा करता हूं। सर्गियो एक शानदार राजदूत साबित होंगे।
पुरानी नीति को ट्रंप प्रशासन ने ताक पर रखा?
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने की अमेरिका की तकरीबन दो दशक पुरानी नीति को ट्रंप प्रशासन ने ताक पर रख दिया है?
कई लोग इसे अमेरिका की दशकों पुरानी भारत नीति के अवतरण के तौर पर देख रहे हैं। जब अमेरिकी सरकार भारत को दक्षिम एशिया का एक देश भर मानती थी, उसके साथ अलग से रिश्तों को दिशा देने की कोशिश नहीं होती थी। ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों जिस तरह से पाकिस्तान के साथ रिश्तों को गर्माहट देने की कोशिश है, उससे भी यीं संकेत मिलता है।
भारतीय कूटनीतिककारों का कहना है कि इससे अमेरिका को लेकर भारतीय नीतिकारों के दृष्टिकोण में भी ठंडापन आ जाएगा। शुल्क नीति को लेकर भारत ने अपने तेवर पहले ही दिखा दिए हैं कि वह अपने हितों को लेकर अमेरिकी दबाव में आने वाला नहीं है। वैसे विदेश मंत्री मार्काे रूबियो ने कहा है कि, “मैं सर्गियो गोर के भारत के राजदूत के तौर पर नामित किये जाने को लेकर उत्सुक हूं। वह अमेरिका के दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों वाले देश में एक शानदार प्रतिनिधि शामिल होंगे।”
ट्रंप की इस नियुक्ति पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल का कहना है कि, “सर्गियो गोर ज्यादा जिम्मेदारी के साथ भारत आ रहे हैं जहां वह अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच सामंजस्य करेंगे। साथ ही इस क्षेत्र में दूसरे देशों यानी पाकिस्तान व अन्य देशों के साथ भारत के रिश्तों पर भी नजर रखेंगे। यानी वह इस क्षेत्र में अमेरिका के अन्य राजदूतों के साथ समन्वय करेंगे ताकि एक समग्र नीति बने। इससे यह भी लगता है कि अमेरिका की नीति भारत के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर केंद्रित नहीं रहेगी। भारतीय राजदूत को दोहरी जिम्मेदारी देने के पीछे की मंशा समस्या से भरी हुई है। यह सामान्य नहीं है।”