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विश्वविद्यालयों के भवन निर्माणों की सुस्ती पर राज्यपाल ने जताई नाराजगी

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लखनऊ। राज्य विश्वविद्यालयों में चल रहीं भवन निर्माण परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि हर परियोजना की शुरुआत से लेकर उसकी समयसीमा, बजट और अब तक की प्रगति का ईमानदारी से मूल्यांकन होना चाहिए। राजभवन में सोमवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने विलंब के वास्तविक कारणों की पहचान कर जल्द समाधान निकालने के निर्देश दिए।

बैठक में केंद्र प्रायोजित पीएम-उषा योजना के तहत विश्वविद्यालयों को मिले फंड और उससे जुड़े निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। राज्यपाल ने कहा कि पीएम-उषा का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मुताबिक उच्च शिक्षा को बेहतर और सुलभ बनाना है। इसलिए फंड का उपयोग पारदर्शी और प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए। भवन निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि डिजाइन छात्रों व शिक्षकों की जरूरतों के हिसाब से तैयार हों।

जर्जर भवनों का निरीक्षण जरूरी 

जर्जर भवनों का समय-समय पर निरीक्षण जरूरी है और सिर्फ वास्तविक आवश्यकता होने पर ही नए भवन बनाए जाएं। पीडब्ल्यूडी को प्रशिक्षित इंजीनियरों की निगरानी में डिजाइन तैयार करने और निर्माण की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। यह भी कहा कि आंगनवाड़ी, विद्यालय और विश्वविद्यालय तीनों की प्रकृति अलग है, इसलिए इनकी बिल्डिंग भी उनकी जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए।

कार्यदायी संस्थाओं का चयन सावधानी से किया जाए और बार-बार एजेंसियां बदलने से बचा जाए। कुलपतियों से कहा कि वे स्वयं निर्माण कार्यों का निरीक्षण करें। विश्वविद्यालयों में छोटे क्लासरूम, उपयोगिता आधारित कमरे, छात्रावासों में वाशिंग मशीन, डिश-वाश एरिया और बड़े किचन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। बैठक में राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डा. सुधीर महादेव बोबडे, विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डा. पंकज एल जानी, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान, कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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