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स्‍त्री नेतृत्‍व ने ही दुनिया को राह दिखाई है: प्रो. कुमुद शर्मा

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। हिंदी विश्‍वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज में स्‍त्री अध्‍ययन विभाग द्वारा अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्‍य में ‘विकसित भारत@ 2047 : राष्‍ट्र निर्माण में महिला नेतृत्‍व की भूमिका और चुनौतियां’ विषय पर एक दिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का आयोजन विश्‍वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्‍यक्षता में क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज में किया गया। 

अध्‍यक्षीय उद्बोधन में महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा की मा. कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि स्‍त्री को आजादी के सच्‍चे अर्थों को जानना जरूरी है। भारत में परंपरा से ही स्‍त्री नेतृत्‍व रहा है तथा उसने ही दुनिया को राह दिखाया है। हमारे यहां की महिला चिंतन परंपरा महादेवी की चिंतन परंपरा है जो महिला नेतृत्व पर जोर देती है।

बीज वक्‍तव्‍य भारतीय उच्‍च अध्‍ययन संस्‍थान, शिमला की पूर्व अध्‍यक्ष प्रो. चंद्रकला पाडिया ने दिया। उन्‍होंने कहा कि महिलाएं नेतृत्‍व में सदैव अग्रणी रही हैं, जब देश का संविधान लिखा जा रहा था तब उस संविधान सभा में 299 सदस्य में 15 महिला सदस्य थीं। हंसा जीवराज द्वारा संविधान में लैंगिक समानता की वकालत की गई तो वही बेगम एजाज रसूल ने राष्ट्रीय एकता का समर्थन करते हुए धर्म के आधार पर देश के विभाजन का विरोध किया। महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में भी अपनी अग्रणी भूमिका निभाई । संविधान निर्माण एवं सामाजिक कल्‍याण में महिलाओं का महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है। 

इस अवसर पर सुश्री अदिति माहेश्‍वरी मुख्‍य अधिशासी अधिकारी, वाणी प्रकाशन समूह, नई दिल्‍ली ने विशिष्‍ट वक्‍तव्‍य में कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक सामूहिक और सामाजिक उत्सव का रूप ले चुका है। महिलाएं पुरातन परंपरा से लेकर नवीन दौर में बौद्धिक संपदा में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। प्रकाशन के क्षेत्र में महिलाओं के विचारों को समाज के सामने लाने के पर्याप्‍त अवसर हैं। महिलाओं का नेतृत्‍व मानवतावादी विचार पर टिका हुआ है। 

 गोविंद बल्‍लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्‍थान, झूंसी प्रयागराज की सह-आचार्य डॉ. अर्चना सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महिला नेतृत्व को बहुत तीव्र उड़ान पंचायती राज के माध्यम से मिली परंतु वहां भी उनके नेतृत्‍व को नीचे धकेलने का प्रयास किया गया, परंतु कई कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण के माध्यम से इन स्थितियों में बदलाव आया और महिलाओं ने ग्राम प्रधान की भूमिका को बहुत जिम्मेदारी के साथ निभाया है। महिला नेतृत्‍व से अलग तरह से अपेक्षा की जाती है। 

कार्यक्रम का प्रास्‍ताविक वक्‍तव्‍य संस्‍कृति विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने दिया। उन्‍होंने कहा कि आज के समय में महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर सचेत हैं। महिलाओं का राष्ट्र निर्माण में नेतृत्व सही मायने में तभी सकार होगा जब हम अपने भूत, वर्तमान और भविष्य का गहन अध्ययन कर अपने अवसरों और चुनौतियों के बारे में जागरूक हों। क्योंकि आज के दौर में महिलाएं राजनीति, खेल, साहित्य आदि सभी क्षेत्रों में देश का नेतृत्व कर रही हैं। 

 स्‍वागत वक्‍तव्‍य क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज के अकादमिक निदेशक प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने दिया।  केंद्र के अकादमिक निदेशक प्रो. अखिलेश कुमार दुबे एवं स्त्री अध्‍ययन विभाग की अध्‍यक्ष डॉ. अवंतिका शुक्ला एवं डॉ. सुप्रिया पाठक ने अतिथियों का स्‍वागत पुष्प गुच्छ, अंगवस्‍त्र, सूत की माला और विश्‍वविद्यालय के प्रतीक चिन्‍ह से किया । कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्‍ज्‍वलन एवं विश्‍वविद्यालय के कुलगीत के साथ तथा समापन राष्‍ट्रगान से किया गया। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी मंजरी कुशवाहा ने किया। कार्यक्रम के अंत में  स्‍त्री अध्‍ययन विभाग की अध्‍यक्ष डॉ. अवंतिका शुक्ला ने सभी अतिथियों को धन्‍यवाद दिया एवं आगे भी सभी से ऐसे ही सहयोग का आग्रह किया। 

इस अवसर पर केंद्र एवं स्‍त्री अध्‍ययन विभाग द्वारा आयोजित विभिन्‍न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाणपत्र एवं पुरस्‍कार प्रदान कर सम्‍मानित किया गया।  इस अवसर पर क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज में डॉ. सुप्रिया पाठक, डॉ. अख्‍तर आलम, डॉ. हरप्रीत कौर, डॉ. मिथिलेश कुमार तिवारी, डॉ. यशार्थ मंजुल, डॉ. विजया सिंह, डॉ. बिश्‍वजीत नारायण, डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, जयेंद्र जायसवाल, राहुल त्रिपाठी, प्रत्‍यूष शुक्‍ल, गीता देवी, देवमूर्ति द्विवेदी, जगजीवन प्रजापति, बिरजू प्रसाद, रोहित कुमार, पीतांबर गौतम सहित बड़ी संख्‍या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित थे।

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