नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत ने राज्य के इतिहास का एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। राज्य में हाल के वर्षों में सबसे अधिक मतदाताओं ने वोट डाले। कई कारकों के मिलने से मतदाताओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया।
मतदान प्रतिशत बढ़ने का एक प्रमुख कारण हालिया परिसीमन था। परिसीमन के बाद विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदली और जनसांख्यिकी में भी बदलाव आया। इससे कई सीटों पर हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के बीच चुनावी समानता बढ़ गई। नतीजतन कई क्षेत्रों में कड़ी टक्कर देखने को मिली, जिसने मतदाताओं को वोट देने के लिए प्रेरित किया।
वोटर लिस्ट की सफाई से बढ़ा सही मतदान
चुनाव आयोग द्वारा विशेष संशोधन के जरिए मृत और डुप्लिकेट वोटरों को सूची से हटा दिया गया। इससे वोटर लिस्ट ज्यादा साफ और सटीक हो गई। अधिकारियों का कहना है कि स्वच्छ वोटर लिस्ट से वास्तविक और योग्य मतदाताओं का प्रतिशत बढ़ा, जिससे कुल मतदान प्रतिशत में उछाल आया। मतदान के दिन राज्य भर में शांतिपूर्ण माहौल रहा। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। कुछ अलग-अलग घटनाओं को छोड़कर कहीं भी बड़े पैमाने पर अशांति या धमकी की खबर नहीं आई। मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से चली।
इस बार असम में चुनावी प्रचार पूरी तरह से त्योहार जैसा हो गया। रैलियां, सामुदायिक कार्यक्रम और ग्रासरूट स्तर पर संपर्क ने माहौल को उत्साही बना दिया। कई मतदाताओं ने इसे “लोकतंत्र का उत्सव” बताया।
महिलाओं का अभूतपूर्व मतदान
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत रही महिलाओं की भागीदारी। कई विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 85 से 87 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो पुरुष मतदाताओं से भी ज्यादा था। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। कई जगहों पर महिलाओं ने कुल मतदान का 50 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा वोट डाले। असम की कुल 2.5 करोड़ मतदाताओं में महिलाएं लगभग 50 प्रतिशत हैं। इस बार महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी ने राजनीतिक जागरूकता और सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की है।
भाजपा की मजबूत ग्रासरूट रणनीति
भाजपा को इस रिकॉर्ड मतदान में अपनी मजबूत संगठनात्मक क्षमता का श्रेय दिया जा रहा है। पार्टी ने बूथ स्तर पर बेहतर प्रबंधन, लक्षित संपर्क और निरंतर प्रचार के जरिए मतदाताओं को सक्रिय किया। खासकर कड़ी टक्कर वाली सीटों पर पार्टी की मेहनत नजर आई। जहां-जहां चुनावी मुकाबला कांटे का था, वहां मतदाताओं का जोश और बढ़ गया। विश्लेषकों का कहना है कि जब जीत-हार का अंतर बहुत कम होने की उम्मीद होती है, तो मतदाता अपने वोट को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं। यही कारण है कि इस बार मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
इस चुनाव ने असम में मतदाता भागीदारी का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। परिसीमन, वोटर लिस्ट संशोधन, महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी और प्रतिस्पर्धी प्रचार जैसे कारकों ने मिलकर राज्य के चुनावी परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
