2027 चुनाव में बिगड़ेगा दिग्गजों का खेल! राजनीतिक दलों की बढ़ी टेंशन
लखनऊ। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में बिजनौर जिले की धामपुर सीट पर जीत-हार का अंतर महज 203 मतों का था और वहां एसआईआर के बाद 29,821 मतदाता कम हो गए हैं। इसी प्रकार बाराबंकी जिले की कुर्सी विधान सभा सीट में जीत-हार का अंतर मात्र 217 वोटों का था, यहां भी अब 34,925 मतदाता कम हो गए हैं।
सहारनपुर जिले की नकुड़ में 315 मतों से जीत-हार हुई थी जबकि यहां 28,055 मतदाता घटे हैं। ये आंकड़े सिर्फ तीन सीटों तक सीमित नहीं हैं। प्रदेश में ऐसी करीब 49 सीटें हैं जहां पिछला चुनाव पांच हजार वोट से कम अंतर पर जीत-हार हुई थी। इन सीटों पर जीत-हार के अंतर से ज्यादा मतदाता घट गए हैं। एसआईआर के बाद अब प्रदेश की राजनीति में नया समीकरण उभर रहा है, जो आने वाले चुनाव में कई दलों का खेल बिगाड़ सकता है।
एसआईआर के तहत प्रदेश में 2.04 करोड़ मतदाता कम हुए हैं इनमें 1.11 करोड़ महिलाएं व 93 लाख पुरुष हैं। महिला मतदाताओं की बड़ी संख्या में कमी भी राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि पिछले चुनावों में महिला वोट निर्णायक भूमिका में उभरे थे। यूं तो प्रदेश की सभी 403 विधान सभा सीटों पर मतदाता कम हुए हैं, किंतु शहरी क्षेत्र की सीटों पर ज्यादा वोट कटे हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी उन सीटों पर आएगी जहां जीत-हार का अंतर महज कुछ सौ वोटों का था और मतदाताओं की संख्या हजारों में घट गई। यह स्थिति किसी भी सीट का पूरा परिणाम पलटने की क्षमता रखती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ये मतदाता किन वर्गों से जुड़े थे और उनका असर किस दल के पक्ष या विपक्ष में पड़ सकता है।
बदले आंकड़े कई सीटों पर पुराने विजेताओं के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकते हैं। वर्ष 2027 में कई बड़े चेहरे इस नए गणित में फंसते नजर आ सकते हैं। राजनीतिक दल भी इस बदलाव को लेकर सतर्क हो गए हैं। बहरहाल, एसआईआर के बाद जो परिस्थितियां हैं उससे स्पष्ट है कि 2027 का चुनाव पूरी तरह नए समीकरणों के साथ लड़ा जाएगा।
इन सीटों पर कम था जीत-हार का अंतर
धामपुर, कुर्सी, नकुड़, सिराथू, बिलग्राम-मल्लावां, तिलहर, अमेठी, जसराना, मंझनपुर, बांसडीह, हंडिया, सिसवा, खागा, फाफामऊ, रामपुर खास, कायमगंज, जहानाबाद, मोहम्मदी, पुवायां, लखीमपुर, कासगंज, चरखारी, बहराइच, बलहा, मऊ, जफराबाद, केराकत, जखनिया, औरैया व रसड़ा आदि।
