नई दिल्ली। भारत पर टैरिफ लगाने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब ऐसा फैसला लेने जा रहे हैं, जिससे लाखों भारतीयों को वापस हिंदुस्तान लौटना पड़ सकता है। अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को डबल झटका लगने वाला है। दरअसल, अपने दूसरे कार्यकाल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह के फैसले ले रहे हैं। वो पूरी दुनिया को चौंका रहे हैं। खासकर अपना सबसे अच्छा दोस्त बताने वाले भारत के खिलाफ ट्रंप जो अपना नफरती एजेंडा चला रहे हैं। उसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा। या तो उन्हें भारत की तरक्की पसंद नहीं आ रही है, या फिर वो अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। टैरिफ के बाद अब ट्रंप की नजर अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीयों पर है। यानी की अब भारतीयों की नौकरी पर भी खतरे की घंटी बजने लगी है। इसके संकेत भी मिलने शुरू हो गए हैं।
वीज़ा कार्यक्रम में आमूलचूल परिवर्तन की योजना बना रहा अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अमेरिकी वीज़ा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण आमूलचूल परिवर्तन का संकेत दिया है, जिसमें लॉटरी-आधारित आवंटन शामिल है। आव्रजन, अमेरिका में सबसे अधिक ध्रुवीकरण करने वाले विषयों में से एक रहा है, जहाँ ट्रंप सरकार विदेशियों पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। इस तरह की जाँच देश में भ्-1ठ वीज़ा धारकों की स्थिति पर भी लागू हो रही है। यह ध्यान देने योग्य है कि भारत में जन्मे लोग भ्-1ठ कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। अमेरिकी सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि 2015 से हर साल स्वीकृत होने वाले सभी भ्-1ठ आवेदनों में से 70 प्रतिशत से अधिक भारतीयों के हैं। चीन में जन्मे लोग दूसरे स्थान पर हैं, जो 2018 से 12-13 प्रतिशत के आसपास मँडरा रहे हैं।
जेडी वेंस ने भी उठाए थे सवाल
अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने एच1बी वीजा पर रोक लगाने की संभावना जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोल के जवाब में सवाल उठाया है कि क्या अब एच1बी वीजा पर रोक लगाने का समय आ गया है। यानी की उन्होंने एच1बी वीजा को रोकने की मांग कर डाली है। हाल ही में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि बड़ी टेक कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर एच1बी वीजा कर्मचारियों को भर्ती करती हैं। जो अमेरिकी पेशेवरों के साथ अन्यायपूर्ण है। उन्होंने उदाहरण दिया था कि कंपनियां हजारों कर्मचारियों को निकालने के बाद भी विदेश वर्क वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं। इसके पहले रिपब्लिकन कांग्रेसी मार्जाेरी टेलर ग्रीन ने भारतीयों को एच1बी वीजा जारी करना बंद करने का सुझाव दिया था। ग्रीन ने आरोप लगाया था कि भारतीय प्रोफेशनल अमेरिका के लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं।
एच-1बी नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेष व्यवसायों में अस्थायी रूप से विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। ऐसे व्यवसायों को कानून इस रूप में परिभाषित करता है कि उनके लिए अत्यधिक विशिष्ट ज्ञान और विशिष्ट विशेषता में स्नातक (बैचलर) या उच्च डिग्री या इसके समकक्ष योग्यता की आवश्यकता होती है। ये वीजा तीन साल के लिए जारी होता है, जिसे 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है। हर साल अमेरिकी सरकार 65000एच1बी वीजा जारी करती है। जबकि 20 हजार अतिरिक्त वीजा अमेरिकी विश्वविद्यालयों से मास्टर या पीएचडी करने वालों के लिए जारी किए जाते हैं।
इसके बंद होने से भारतीयों को कितना नुकसान होगा
भारत लंबे समय से एच1बी वीजा का लाभ लेने वाला देश रहा है, विशेषरूप से आईटी और टेक्नोलॉजी पेशेवरों के लिए। हर साल हजारों भारतीय इंजीनियर, डॉक्टर और शोधकर्ता एच1बी वीजा से अमेरिका जाते हैं। अगर नियम सख्त किए गए या रोक लगाई गई तो इसका सीधा असर भारत के आईटी सेक्टर या भारतीय टैलेंट पर पड़ेगा।
2015 के बाद से भारतीयों को हर साल 70ः हिस्सेदारी
गौरतलब है कि भारत में जन्मे लोग एच-1बी कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। अमेरिकी सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि 2015 से हर साल स्वीकृत होने वाले सभी एच-1बी आवेदनों में से 70 प्रतिशत से ज़्यादा भारतीय हैं। चीन में जन्मे लोग दूसरे स्थान पर हैं, जो 2018 से 12-13 प्रतिशत के आसपास मँडरा रहे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अक्टूबर 2022 और सितंबर 2023 के बीच, भ्-1ठ कार्यक्रम के तहत जारी किए गए लगभग 4 लाख वीज़ा में से 72 प्रतिशत भारतीय नागरिकों को मिले। इसी अवधि के दौरान, अमेरिका में मौजूद शीर्ष चार भारतीय आईटी कंपनियों - इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल और विप्रो - को लगभग 20,000 कर्मचारियों को भ्-1ठ वीज़ा पर काम करने की मंज़ूरी मिली, जैसा कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा के आंकड़ों से पता चलता है।
अमेरिकी कंपनियों को मिली मदद
अमेरिका में एच-1बी वीज़ा की बढ़ती आलोचनाओं के बीच, भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि इन वीज़ा का फ़ायदा अंततः अमेरिकी टेक कंपनियों को ही मिल रहा है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अधिकारियों ने स्वीकार किया कि एच-1बी वीज़ा, जिसके प्रमुख लाभार्थी भारतीय हैं, पर प्रतिबंध भारत के आईटी क्षेत्र और उसके कर्मचारियों पर असर डाल सकते हैं। यह निश्चित रूप से अमेरिका में भारतीय कामगारों की पहुँच को सीमित कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ की आईटी कंपनियों को अमेरिका-आधारित अनुबंध मिलेंगे, जिससे उनके राजस्व में कमी आ सकती है। लेकिन वीज़ा ने अमेरिकी कंपनियों को दुनिया भर में सही कर्मचारी ढूँढ़ने में काफ़ी मदद की है, और क्या वे इसकी जगह अमेरिकी लोगों को ला पाएँगी, यह स्पष्ट नहीं है। निश्चित रूप से यह कोई आसान बदलाव नहीं है।