प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व धारा 406 के अपराध की कार्यवाही एक साथ नहीं चल सकती। यह टिप्पणी कर कोर्ट ने गाजीपुर के आतिफ राजा उर्फ शरजील राजा व दो अन्य के खिलाफ सीजेएम द्वारा इन धाराओं मे पुलिस चार्जशीट पर संज्ञान ले समन जारी करने संबंधी तीन जुलाई 2023 का आदेश अवैध करार दे रद कर दिया है।
मजिस्ट्रेट को 30 दिन में नए सिरे से संज्ञान आदेश देने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पीके गिरि ने याची के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय को सुन कर दिया है। सैयदबाड़ा के महमूद आलम ने याची व दो अन्य के खिलाफ कोतवाली में एफआइआर दर्ज कराई। आरोप लगाया कि उसकी, रवींद्र नारायण सिंह व बैस खान की मेसर्स विकास कांस्ट्रक्शन नामक भागीदारी फर्म है।
याची ने 2010 में उसे भी अपनी फर्म में शामिल करने को कहा व न करने पर हत्या की धमकी दी। इसके बाद भयवश याची व उसके साथियों को भी फर्म में भागीदार बनाया गया। फिर फर्म के एसबीआइ खाते में शिकायतकर्ता के 76 लाख रुपये के अलावा अन्य भागीदारों का जमा करोड़ों रुपये याची ने हड़प लिया।
शिकायतकर्ता के बेटे की 2015 में मौत हो गई। फिर उसने घपले व धोखाधड़ी के आरोप में एफआइआर दर्ज कराई। पुलिस की चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान ले समन जारी किया था। इसकी वैधता को चुनौती दी गई थी। याची के अधिवक्ता ने कहा कि धारा 420 व 406 साथ नहीं लग सकती।
