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हाई कोर्ट: वैध पत्नी नहीं होने की दशा में भी गुजारा भत्ता देने वाले आदेश पर रोक लगाई

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हई कोर्ट ने परिवार अदालत चित्रकूट द्वारा पति से तलाक लिए बिना दूसरे पति के साथ रहने वाली कथित पत्नी को गुजारा भत्ता दिए जाने संबंधी आदेश के अमल पर रोक लगा दी है। साथ ही विपक्षी (कथित पत्नी) व बच्ची को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने संतोष कुमार की याचिका पर दिया है।

याची के अधिवक्ता ने क्या दिया तर्क?

याची के लिए अधिवक्ता जयदीप त्रिपाठी व अजय कुमार पांडेय ने बहस की। इनका कहना था कि विपक्षी रन्नो उसकी वैध पत्नी नहीं है। इसलिए उसके पक्ष में परिवार अदालत का गुजारा भत्ता देने का आदेश विधि विरूद्ध है। विपक्षी की शादी शारदा प्रसाद से हुई थी। उससे कोर्ट के जरिए तलाक नहीं लिया और याची के साथ बतौर पत्नी रहने लगी।

परिवार अदालत ने गुजारा भत्ता देने का दिया आदेश 

उसने धारा 125 सीआरपीसी में परिवार अदालत में अर्जी दी। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने विपक्षी पत्नी को दो हजार व बच्ची को एक हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। इसे चुनौती दी गई। याची के अधिवक्ता का कहना था कि विपक्षी उसकी वैध पत्नी नहीं है तो उसे गुजारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं है। उसने स्वीकार किया है कि शादी की है किन्तु शादी में सप्तपदी नहीं हुई थी। इसलिए परिवार अदालत का आदेश रद किया जाय।

हाई कोर्ट ने विपक्षियों से जवाब मांगा है 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह मुद्दा विचारणीय माना और प्रधान न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगाई। इसके साथ ही विपक्षियों से याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

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