प्रयागराज (राजेश सिंह)। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के माघ मेला शिविर में अखिल भारतीय धर्म आचार्य संपर्क विभाग की बैठक हो रही है। इसमें देशभर के पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। समाज को जागृत करने के साथ वर्तमान की समस्याओं पर यहां विमर्श किया जा रहा है। धर्माचार्यों को संबोधित करते हुए विहिप के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि सनातन के विस्तार के लिए अयोध्या में आचार्यों का प्रशिक्षण चल रहा है। उनको अंग्रेजी, कंप्यूटर, वाद्य यंत्रों की भी शिक्षा दी जा रही है। इसमें किसी तरह का जाति बंधन नहीं है।
सामाजिक समरसता के लिए संतों को आगे आना होगा
विहिप के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा, हमारा कार्य पूज्य संतों से संपर्क, मठ मंदिरों में संपर्क का है, जबकि समाज को जागृत करना संतों का कार्य है। उनके मार्गदर्शन से हिंदू समाज जागृत होता है, धर्म संस्कृति एवं संस्कार के लिए संत हमें प्रेरित करते हैं। विहिप की स्थापना का उद्देश्य हिंदू धर्म, संस्कृति का जागरण है। सामाजिक समरसता के लिए संतों को आगे आना होगा। सकल हिंदू समाज एक है। इस राष्ट्र में उत्पन्न सभी मत, पंथ, संप्रदाय एक हैं।
हिंदू समाज के मत, पंथ, संप्रदाय का लक्ष्य एक
तीन दिवसीय इस आयोजन में विहिप के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा, अनेक विचारों को मानने वाले हिंदू समाज के मत, पंथ, संप्रदाय का लक्ष्य एक है। सामाजिक समरसता का भाव हिंदू समाज में जागृत कर हम हिंदू समाज के विघटन के लिए किए जा रहे षड्यंत्रों का करारा जवाब देगे। मतांतरण बड़ी चुनौती है। इसका जवाब एक जुटता से दिया जा सकता है।
संतों से जागरण के लिए आगे आने को करें निवेदन
बोले कि भेदभाव को समाप्त करते हुए उड़ीसा में अनुसूचित वर्ग की कन्याओं को वेद की शिक्षा दी जा रही है। हम सब की जिम्मेदारी है कि संतों से निवेदन करें कि वह जागरण के लिए आगे आएं। मठ, मंदिरों को सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनाकर समाज में संस्कारों के प्रति धर्म संस्कृति का बोध कराते हुए जो अपनी जड़ों से कट गए हैं उन्हें जोड़ने का कार्य करें।
विहिप का प्रत्येक कार्य संतों के मार्गदर्शन से होता है
विहिप के केंद्रीय संरक्षक दिनेश चंद्र ने कहा की विहिप का प्रत्येक कार्य संतों के मार्गदर्शन से होता है। इस दौरान अखिल भारतीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी, केंद्रीय सह मंत्री हरिशंकर, वीरेंद्र विमल, क्षेत्रीय धर्माचार्य संपर्क प्रमुख जितेंद्र, आद्याशंकर मिश्र, नरसिंह त्रिपाठी, वीरेंद्र मणि त्रिपाठी, केंद्रीय प्रबंध समिति के सदस्य जीवेश्वर मिश्र आदि उपस्थित रहे।
