रामायण की गाथा जीवंत हुई, 'कैकेयी वरदान' नाटक देख भावुक हुए लोग
प्रयागराज (राजेश सिंह) । प्रयागराज में शुक्रवार शाम उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में 'चलो मन गंगा-यमुना तीर' कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। संगम तट और त्रिवेणी धाम के पास सेक्टर 3 स्थित किला गेट चौराहे पर आयोजित इस कार्यक्रम में आस्था और कला का संगम देखने को मिला।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत काशी के अमलेश शुक्ला के भजनों से हुई। उन्होंने 'मर्यादा है इस देश की पहचान है गंगा' और 'बम बम बोल रहा है काशी' जैसे भजन प्रस्तुत किए। इसके बाद भोजपुरी गायिका कुसुम पाण्डेय ने 'नजर लागी राजा तोरे बंगले पर' और 'दिलवा लगा ले श्री राम से' जैसे गीतों से श्रोताओं का मनोरंजन किया।
शाम का मुख्य आकर्षण 'द थर्ड बेल' संस्था द्वारा प्रस्तुत नाटक 'कैकेयी वरदान' रहा। आलोक नायर के निर्देशन में कलाकारों ने रामायण के उस प्रसंग को जीवंत किया, जिसमें मंथरा की कुटिलता के कारण अयोध्या का उल्लास विषाद में बदल गया था। ऋतिका अवस्थी (कैकेयी), अतुल कुशवाहा (दशरथ) और शिवांक द्विवेदी (श्रीराम) के अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया।
असम की हिमांजली बरुआ ने शास्त्रीय 'सतरिया नृत्य' के माध्यम से भगवान कृष्ण की लीलाओं का प्रदर्शन किया। मिताली वर्मा ने 'कथक' के जरिए गंगा अवतरण की कथा को मंच पर प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ लेटे हनुमान मंदिर के छोटे महंत परमानंद पुरी जी महाराज और अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने सभी कलाकारों को पौधे भेंट कर सम्मानित किया।


