किसान-मजदूर संघ ने मशीनी खनन बंद करने को लेकर प्रदर्शन किया
प्रयागराज (राजेश सिंह)। बारा क्षेत्र में यमुना नदी में नाव से बालू खनन फिर से शुरू करने की मांग को लेकर किसान मजदूर यूनियन संघ ने शनिवार को धरना-प्रदर्शन और जुलूस निकाले। भीटा पावर हाउस के पास बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और नाविक एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मशीनों द्वारा हो रहे खनन को तत्काल बंद करना और पारंपरिक नाव आधारित बालू खनन को फिर से चालू करना था।
किसान मजदूर संघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि एनजीटी का हवाला केवल एक बहाना है, जबकि वास्तविक उद्देश्य नाव से बालू खनन को रोकना है। उन्होंने कहा कि मशीनों से खनन के कारण यमुना नदी के प्राकृतिक स्वरूप को भारी नुकसान हो रहा है, जबकि नाव से किया जाने वाला खनन सीमित और पर्यावरण के अनुकूल होता है।
जुलूस के दौरान ष्मशीन से खनन बंद करो, नाव से खनन चालू करोष् जैसे नारे लगाए गए।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्ष 2019 से यमुना नदी में नाव द्वारा बालू खनन पर रोक लगने के बाद तराई क्षेत्र के कई गांवों, जैसे सेमरी तरहार, अमिलिया तरहार, महेरा, भभउर, भीटा और बसवार, के किसान, मजदूर और नाविक वर्ग रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं।
इन क्षेत्रों की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बालू खनन पर निर्भर थी। उनका कहना था कि सरकार नए रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं करा पा रही है, जिससे पूरे उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और भुखमरी बढ़ रही है।
संघ ने आरोप लगाया कि सरकार ने एनजीटी का हवाला देकर पारंपरिक खनन पर रोक लगा दी, लेकिन इसके बदले वैकल्पिक रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की।
उनका यह भी आरोप था कि ष्सूखे रेत का पट्टाष् लागू होने के बाद मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है। इससे अमीर और माफिया वर्ग को लाभ हो रहा है, जबकि गरीब मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुँच गए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि मजदूरों की आवाज को दबंगों और माफियाओं के प्रभाव में दबा दिया जाता है। किसान मजदूर संघ लगातार धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
