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प्रयागराज में हाई कोर्ट आरओबी को लेकर रेलवे का ऐलान

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एक वर्ष में अपना काम पूरा कर लेगी, लाखों लोगों को आवागमन में होगी राहत

प्रयागराज (राजेश सिंह)। संगम नगरी की लाइफ लाइन कहे जाने वाले हाई कोर्ट पानी टंकी रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के कायाकल्प को लेकर अब उत्तर मध्य रेलवे  (एनसीआर) ने कमान संभाल ली है। वर्षों से जर्जर हाल में पड़े इस पुल को लेकर जहां सेतु निगम अपनी दो वर्ष की लंबी योजना पर काम कर रहा है, वहीं रेलवे ने अपने हिस्से के निर्माण को महज एक वर्ष के भीतर रिकार्ड समय में पूरा करने का संकल्प लिया है। इस कदम से शहर के लाखों लोगों को आवागमन में जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

एनसीआर ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए अपनी निविदाएं (टेंडर) आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। रेलवे के हिस्से में आने वाले निर्माण कार्य पर लगभग साढ़े 19 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस बजट के साथ रेलवे रेल लाइन के ऊपर गार्डर लॉन्चिंग और तकनीकी ढांचे को तैयार करने का जिम्मा संभालेगा। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, 17 मार्च को टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और आवंटन के तुरंत बाद जमीनी स्तर पर काम शुरू हो जाएगा। रेलवे का अप्रैल 2026 तक वह अपने हिस्से का काम हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य है।

इस परियोजना में सेतु निगम, जिसे पूरे पुल के ढांचे और पहुंच मार्ग (एप्रोच रोड) का निर्माण करना है, उसने इस कार्य को पूरा करने के लिए दो वर्ष का समय मांगा है। सेतु निगम के अनुसार, पुराने ढांचे को ढहाने और नए टू-लेन आरओबी को खड़ा करने में जून 2024 से जून 2026 तक का समय लगेगा।हालांकि, रेलवे ने अपनी कार्ययोजना को श्फास्ट ट्रैकश् पर रखते हुए स्पष्ट किया है कि वह रेल पटरियों के ऊपर के जटिल काम को सिर्फ एक वर्ष में पूरा करेगा। रेलवे की इस सक्रियता से सेतु निगम पर भी काम को गति देने का मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ेगा, ताकि जैसे ही पिलर तैयार हों, रेलवे तुरंत अपने गार्डर रख सके।

यह आरओबी लगभग 60 साल पहले बनाया गया था, जो पुराने शहर को नए शहर (सिविल लाइंस) से जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। समय के साथ यह जर्जर हो गया है। वर्ष 2024 में पीडब्ल्यूडी ने इसे असुरक्षित घोषित कर दिया था। सुरक्षा को देखते हुए नवंबर 2024 से ही यहाँ चार पहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था, जिससे प्रतिदिन गुजरने वाले 50 से 60 हजार वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस आरओबी के महत्व को देखते हुए पहले ही 51.50 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इसमें से 11.58 करोड़ रुपये की पहली किस्त 12 फरवरी को जारी की जा चुकी है। अब जब रेलवे ने अपने हिस्से का टेंडर जारी कर दिया है, तो यह तय हो गया है कि जीटी रोड से लीडर रोड का जुड़ाव एक बार फिर आधुनिक और सुरक्षित रूप में बहाल होगा।

नया पुल टू-लेन का होगा, जिससे भविष्य में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और खुसरोबाग की तरफ जाने वाले यात्रियों को जाम से स्थायी मुक्ति मिलेगी। रेलवे की इस श्सुपरफास्टश् पहल ने प्रयागराज के विकास को एक नई दिशा देने का संकेत दे दिया है।

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