जनप्रतिनिधियों के ख़िलाफ़ कोरोना गाइडलाइन के उल्लंघन के मामले में राहत दी
प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 जनप्रतिनिधियो के खिलाफ कोरोना गाइडलाइन के उल्लंघन सहित अन्य छोटे अपराध के 28 केस वापस लेने की राज्य सरकार को अनुमति दे दी है।और शेष गंभीर अपराध के मामलो की अर्जी को सुनवाई के लिए 26 फरवरी की तिथि नियत की है ।राज्य सरकार ने कुल 72 अर्जियां दाखिल की है, जिनमें जनप्रतिनिधियों के आपराधिक केस वापस लेने की हाईकोर्ट से अनुमति मांगी गई है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को लोक अभियोजक के मार्फत इन 28 मामलो में संबंधित अदालतों में केस वापसी अर्जी देने तथा कोर्ट द्वारा उन्हें गुण-दोष के आधार पर तय करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने एम पी ,एम एल ए केस वापसी मामले में स्वतरू कायम आपराधिक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
एम पी ,एम एल ए के खिलाफ आपराधिक केस सरकार द्वारा वापस लेने के मामले को लेकर अश्वनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी कर कहा था कि केस वापसी की अनुमति हाईकोर्ट से ली जाय।बिना हाईकोर्ट की अनुमति लिए ट्रायल कोर्ट में केस वापसी की कोई अर्जी दाखिल नहीं की जायेगी।जिसपर सरकार की तरफ से अर्जियां दाखिल की गई थी।
धारा 321मे राज्य सरकार को आपराधिक केस वापस लेने का अधिकार दिया गया है। सरकार अभियोजन के लिए साक्ष्य का अभाव व न्याय हित में केस वापसी की अर्जी देती है।
हाईकोर्ट ने विस्तृत आदेश में गाइडलाइन देते हुए कहा पहले लोक अभियोजक अर्जी तैयार करें और सरकार को अनुमति के लिए भेजे। सरकार की लिखित अनुमति मिलने के बाद अर्जी ट्रायल कोर्ट में दाखिल की जाय। इसके बाद ट्रायल कोर्ट शिकायतकर्ता, पीड़ित,व गवाहों की आपत्ति लेकर विचार करे।और संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कर सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को भेजे। इसके बाद राज्य सरकार हाईकोर्ट में केस वापस लेने की अनुमति अर्जी दाखिल करें।यदि हाईकोर्ट अनुमति देती है तो ट्रायल कोर्ट में हर केस में अलग अलग अर्जी दाखिल हो जिसपर अदालत विवेकानुसार मेरिट पर फैसला ले।
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कोरोना मामले में केस वापस लेने की सरकार नीति तैयार करेगी।
हाईकोर्ट ने केस वापसी की गाइडलाइन जारी करते हुए छोटे अपराध की वापसी की 28अर्जियो को प्रक्रिया में छूट देते हुए स्वीकार कर लिया है। किंतु गंभीर अपराध के मामले में दाखिल अर्जियों पर अनुमति पर विचार करेगी।
