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शंकराचार्य का केस झूठा तो नहीं: हाईकोर्ट

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आशुतोष महाराज और बटुकों ने कुकर्म की अलग डेट बताई, 11 पॉइंट में कोर्ट का आदेश

प्रयागराज (राजेश सिंह)।  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। केस दर्ज कराने वाले आशुतोष महाराज पर कई सवाल उठे हैं। कोर्ट ने पाया कि पीड़ित यानी बटुकों ने 18 जनवरी की घटना बताई, जबकि आशुतोष महाराज ने 24 जनवरी की। पीड़ित बच्चों को प्रॉपर कस्टडी में क्यों नहीं लिया गया।

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किसी बच्चे के साथ कोई घटना होती है, तो वह सबसे पहले अपने परिवार या मां-पिता को बताता है। बटुक आशुतोष महाराज को पहले से नहीं जानते थे। फिर उन्होंने सबसे पहले आशुतोष महाराज को घटना क्यों बताई? कोर्ट ने कहा- ऐसे में घटना और FIR को सावधानीपूर्वक देखना होगा, कहीं ये झूठा केस तो नहीं है।

कोर्ट ने आशुतोष महाराज से पूछा- 6 दिन बाद क्यों आए

1. मामला पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ। केस उस व्यक्ति (आशुतोष महाराज) की अर्जी पर दर्ज हुआ, जो खुद को बटुकों का कथित तौर पर गार्जियन बता रहा।

2. बटुकों ने 18 जनवरी की घटना बताई, जबकि आशुतोष महाराज ने 24 जनवरी की घटना बताई। कोर्ट ने पूछा कि जब 18 जनवरी को घटना हुई तो 6 दिन बाद आप क्यों आए? पूछने पर आशुतोष महाराज ने जवाब दिया कि यज्ञ और पूजा में व्यस्त थे। कोर्ट ने कहा- ये कोई जवाब नहीं, तुरंत आना चाहिए था।

3. बटुक यानी पीड़ित बच्चे आशुतोष महाराज के टच में थे तो उन्हें 25 जनवरी तक प्रॉपर कस्टडी में क्यों नहीं दिया गया। यह पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन है, क्योंकि बच्चों के मामले में पीड़ित को तुरंत पुलिस कस्टडी में दे देना चाहिए। ताकि उनकी मेडिकल जांच अच्छे से हो सके।

कुकर्म पीड़ित सबसे पहले अपने परिवार को दर्द बताएगा

4. सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि किसी बच्चे के साथ कोई घटना होती है तो वह सबसे पहले अपने परिवार या मां-पिता को बताता है। जबकि बटुक आशुतोष महाराज को पहले से जानते नहीं, जैसा कि आशुतोष महाराज ने कहा था कि बटुक उनके पास भागकर आए और ऐसे में अंजान व्यक्ति यानी आशुतोष महाराज को बटुकों ने बताया। कोर्ट ने कहा कि ये बात मानवीय कार्यशैली के खिलाफ है। कुकर्म पीड़ित सबसे पहले अपने परिवार को दर्द बताएगा।

5. आशुतोष महाराज ने घटना महाकुंभ और माघ मेला की बताई, जबकि पीड़ित बटुकों ने नरसिंगपुर मध्यप्रदेश और बद्रीनाथ, उत्तराखंड में हुई बताया। ऐसे में विरोधाभास है।

6. एक बटुक की जन्मतिथि में गड़बड़ी सामने आई। एक बटुक एक अगस्त 2026 को मेजर यानी बालिग हो गया। जबकि घटना जब हुई तो वह नाबालिग था। सर्टिफिकेट जो सामने आए, उनमें फर्क मिला।

बटुक शंकराचार्य के आश्रम के स्टूडेंट नहीं थे, दावा गलत निकला

7. आशुतोष महाराज ने दावा किया था कि दोनों पीड़ित बटुक शंकराचार्य के आश्रम के स्टूडेंट थे। जांच में ये सामने आया कि दोनों संस्कृत स्कूल हरदोई में पढ़ाई करते थे। जबकि आशुतोष महाराज ने दावा किया था कि शंकराचार्य के आश्रम में कुकर्म होता था।

8. मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टरों ने लिखा कि प्राइवेट पार्ट पर बाहरी चोट नहीं है। हालांकि सेक्सुअल असाल्ट हरेशमेंट (कुकर्म) को नकारा भी नहीं जा सकता। डॉक्टरों ने कहा कि FSL जांच करानी चाहिए।

कोर्ट ने डॉक्टरों के लिए कहा कि FSL रिपोर्ट भी आपने मांगी और ये भी दावा किया कि कुकर्म नकारा नहीं जा सकता... इसका क्या मतलब। डॉक्टरों ने निर्णायण रिपोर्ट नहीं दी कि कुकर्म हुआ है।

9. शंकराचार्य पर कुकर्म के आरोप लगे, तो शंकराचार्य का मेडिकल क्यों नहीं हुआ, जबकि पॉक्सो के मामले में पीड़ित बच्चे और जिन पर आरोप है, दोनों का मेडिकल जरूरी है।

कहीं ये झूठा केस तो नहीं है…

10. FIR तब कराई गई जब मौनी अमावस्या पर हंगामा हुआ। प्रयागराज प्रशासन और आरोपी यानी शंकराचार्य के बीच विवाद हो गया। इससे पहले पीड़ित बच्चे, उनके घरवाले या कथित गार्जियन कहां थे। इससे पहले मामला सामने नहीं आया।

11. कोर्ट ने कहा- ऐसे में इन घटना और FIR को सावधानीपूर्वक देखना होगा। यानी पॉइंट-पॉइंट देखना होगा कि कहीं ये झूठा केस तो नहीं है।

हाईकोर्ट के फैसले से शंकराचार्य को बड़ी राहत

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। यह फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने दोपहर बाद 3.45 बजे सुनाया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जमानत देते हुए शर्तें भी लगाई हैं। सबसे अहम शर्त यह है कि दोनों पक्ष (शंकराचार्य और आशुतोष) मीडिया में बयानबाजी नहीं करेंगे और इंटरव्यू नहीं देंगे। शंकराचार्य के विदेश जाने पर भी रोक है। इसके लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होगी। अगर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो दूसरा पक्ष जमानत कैंसिलेशन अर्जी दे सकता है।

यह फैसला सुनाने के दौरान शंकराचार्य के वकीलों ने कहा- योर ऑनर इस पर भी कहें कि कोई बच्चों को लेकर घूमने लगता है, कोई यात्रा के दौरान बयानबाजी करता है। इसे भी रोका जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि इसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट के फैसले से शंकराचार्य को बड़ी राहत मिली है।

ये तस्वीर 27 फरवरी की है, जब हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। इसके बाद शंकराचार्य ने बटुकों की पूजा की थी। साथ ही लोगों ने जयकारे लगाए थे।

ये तस्वीर 27 फरवरी की है, जब हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। इसके बाद शंकराचार्य ने बटुकों की पूजा की थी। साथ ही लोगों ने जयकारे लगाए थे।

शंकराचार्य की गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे आशुतोष महाराज

आशुतोष महाराज की प्रवक्ता रीना एन. सिंह ने बताया- हाईकोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद को जमानत दी है। इसके बावजूद हमारी न्याय के लिए लड़ाई जारी रहेगी। हम इस आदेश से असंतुष्ट हैं। न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हम धर्म की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। शंकराचार्य की गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

90 दिन के अंदर दाखिल करनी होती है चार्जशीट

अगर आरोपी जेल में है, तो पुलिस को हर हाल में 90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। नहीं, तो कोर्ट जवाब मांग लेता है। लेकिन, अगर आरोपी गिरफ्तार नहीं है, तो पुलिस जांच के नाम पर कुछ वक्त ले सकती है। लेकिन, पुलिस को इसकी वजह बतानी होगी।

अब जानिए क्या होती है चार्जशीट

चार्जशीट वह रिपोर्ट होती है जो पुलिस जांच पूरी होने के बाद कोर्ट में देती है। इसमें बताया जाता है कि आरोपी ने क्या किया? उसके खिलाफ कौन-कौन से सबूत हैं? किन कानूनों के तहत केस बनेगा? इसके बाद कोर्ट तय करता है कि केस चलेगा या नहीं। आसान शब्दों में कहें, तो चार्जशीट का सीधा मतलब है कि पुलिस ने अपना काम खत्म कर लिया। अब फैसला कोर्ट को करना है।

27 फरवरी को रिजर्व हुआ था फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न केस में 27 फरवरी को शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। तब जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा था कि फैसला आने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। शंकराचार्य पुलिस की जांच में सहयोग करेंगे।

कोर्ट में शंकराचार्य का पक्ष वकील पीएन मिश्रा ने रखा था, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए थे। शिकायकर्ता आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने भी दलीलें रखी थीं। शंकराचार्य ने बटुकों के यौन उत्पीड़न मामले में 24 फरवरी को अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी।

दरअसल, तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जज (रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया के आदेश के बाद झूंसी थाने की पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बटुकों से कुकर्म की 21 फरवरी को FIR दर्ज की थी।

कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने काशी में दैनिक भास्कर से कहा था- सच को सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट सहित जो भी हो, वो होना चाहिए। झूठ की उम्र लंबी नहीं होती। सभी प्रमाण पेश किए जाएंगे। फैसला पक्ष में न आने पर उच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख करेंगे।

अब जानिए पूरा मामला

प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे।

पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया था। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए थे। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई थी।

FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए थे। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया था। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।

26 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आई थी। पुलिस सूत्रों का दावा है कि बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हुई है। इधर, एक पीड़ित बटुक पहली बार मीडिया के सामने आया था। एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उसने दावा किया था- मैं अध्ययन के लिए गया था, तभी मेरा शोषण किया गया।






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