एक साथ कई ट्रेन नियंत्रित होंगी, प्लेटफार्म पर दबाव कम होगा
प्रयागराज (राजेश सिंह)। रेलवे स्टेशनों के साथ अब यार्ड भी छोटे और स्मार्ट बनेंगे। नए बनने वाले यार्डों और पुराने यार्डों के री-माडलिंग के समय अब प्लानिंग स्टेज पर ही इन स्मार्ट लेआउट्स को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। यार्डों को स्मार्ट बनाने के लिए रेलवे अब डायमंड क्रासिंग्स और सिजर्स क्रासओवर्स जैसे आधुनिक और काम्पैक्ट लेआउट्स को प्राथमिकता देगा।
क्या मिलेगा फायदा?
सामान्य क्रासओवर्स (पटरियां बदलने वाले जोड़) बहुत अधिक लंबी जगह घेरते हैं। इसके विपरीत, सिजर्स क्रासओवर एक ही जगह पर पटरियों का जाल बिछा देते हैं, जिससे ट्रेनों को पटरी बदलने के लिए बहुत दूर तक नहीं जाना पड़ता। यार्ड छोटा होने से ट्रेनें स्टेशन के पास कम समय में अपनी दिशा बदल सकेंगी, एक साथ कई ट्रेनों को नियंत्रित करना आसान होगा, जिससे स्टेशनों पर प्लेटफार्म खाली होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
रेलवे बोर्ड सभी जोनल रेलवे को किया सचेत
अब इन सभी लेआउट्स में कंक्रीट स्लीपर्स और मजबूत स्टील क्रासिंग्स का प्रयोग होने से रखरखाव कम करना पड़ेगा और पटरियों की उम्र बढ़ेगी। रेलवे बोर्ड ने 30 अप्रैल को सभी जोनल रेलवे को सचेत किया है कि मौजूद डायमंड और सिजर्स क्रासओवर्स को बिना किसी ठोस तकनीकी कारण और बिना चीफ ट्रैक इंजीनियर की अनुमति के न हटाया जाए।
