नंदनी नाम की गर्लफ्रेंड से शादी की, बेटा विद्यापीठ में संस्कृत पढ़ रहा
प्रयागराज (राजेश सिंह)। अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन उत्पीड़न की FIR कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने रविवार को एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की पत्नी-बेटा है। उनका बेटा विद्यापीठ में पढ़ रहा है। मठ में पत्नी भी साथ रहती है। आप लोग चाहो तो तीनों का DNA करा लें।
यह तथाकथित फर्जी और नकली शंकराचार्य है। भगवान के नाम पर ये बदनाम कर रहा है। मठ को बदनाम कर रहा है। जब इसका पुत्र है। इसकी पत्नी है तो कैसा संत? उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज इस समय शामली में है। वहीं से यह वीडियो जारी किया है।
दरअसल, आशुतोष महाराज, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बटुकों से यौन शोषण के आरोप के मामले के पैरवीकार हैं। उन्होंने ही बटुकों को कोर्ट के सामने पेश कर एफआईआर कराई थी। हालांकि, शंकराचार्य को इस मामले में हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है।
आशुतोष महाराज ने कहा कि हम हरिद्वार और ऋषिकेश के प्रवास पर थे। इस दौरान बहुत सारे संतों के बीच में हमारा रहना हुआ है। क्योंकि हमारी 'सनातन न्याय यात्रा' निकलने जा रही है। उसी को लेकर हम संत समाज को जोड़ रहे हैं।
यह यात्रा अपने भगवान आदि गुरु शंकराचार्य जी की पवित्र गद्दी को बचानने के लिए है। इस यात्रा में हम लोगों को बताएंगे। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पत्नी और बेटा है। नंदिनी नाम की लड़की इसकी (शंकराचार्य) गर्लफ्रेंड थी। उसी से इनकी गोपनीय शादी हुई है। शादी के बाद से उसका नाम 'पूर्णाम्बा' हो गया।
वह इनके साथ रहती है। क्यों रहती है, बताइए मुझे? शादी से दोनों के एक बच्चा है। यह बच्चा विद्यापीठ में पढ़ रहा है। उस बच्चे का नाम हम जल्दी बताएंगे। वो बालक विद्यापीठ में ही क्यों पढ़ रहा है? उसे इसलिए पढ़ाया जा रहा है, ताकि आगे संत बन सके।
हम तो इनको संत नहीं मानते। ये फर्जी हैं। जगतगुरु शंकराचार्य भगवान की गद्दी को फर्जी तरीके से अपने आप को शंकराचार्य बताते हैं। जबकि माननीय उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कि कोई शंकराचार्य ज्योतिष पीठ का नहीं है।
शंकराचार्य की अग्रिम जमानत मंजूर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बटुकों से यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 25 मार्च को उनकी अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- चार्जशीट दाखिल होने तक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी नहीं होगी।
कोर्ट ने शंकरचार्य के अलावा आशुतोष महाराज पर भी मीडिया इंटरव्यू या बयानबाजी से रोका है। बेंच ने केस दर्ज कराने वाले आशुतोष महाराज पर कई सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पाया कि पीड़ित यानी बटुकों ने 18 जनवरी की घटना बताई, जबकि आशुतोष महाराज ने 24 जनवरी की। पीड़ित बच्चों को प्रॉपर कस्टडी में क्यों नहीं लिया गया।
किसी बच्चे के साथ कोई घटना होती है, तो वह सबसे पहले अपने परिवार या मां-पिता को बताता है। बटुक आशुतोष महाराज को पहले से नहीं जानते थे। फिर उन्होंने सबसे पहले आशुतोष महाराज को घटना क्यों बताई? कोर्ट ने कहा- ऐसे में घटना और FIR को सावधानीपूर्वक देखना होगा, कहीं ये झूठा केस तो नहीं है।
उधर, हाईकोर्ट से शंकराचार्य को मिले अग्रिम जमानत के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया। उन्होंने उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए एक याचिका दायर की है।
अब जानिए पूरा मामला
प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे।
पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया था। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए थे। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई थी।
FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए थे। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया था। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
26 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आई थी। पुलिस सूत्रों का दावा है कि बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हुई है। इधर, एक पीड़ित बटुक पहली बार मीडिया के सामने आया था। एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उसने दावा किया था- मैं अध्ययन के लिए गया था, तभी मेरा शोषण किया गया।
