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ईरान के परमाणु केंद्र पर अमेरिका ने गिराए 2000 पाउंड के बम

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में मंगलवार को एक बार फिर ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र पर 2000 पाउंड के बंकर बस्टर बम से हमला किया। इससे रात के अंधेरे में कई मीटर ऊंचे आग के गोले उठते देखे गए और आसमान धुएं से भर उठा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस हमले के फुटेज जारी किए। इससे ट्रंप द्वारा ईरान के ऊर्जा ढांचों पर हमले न करने की दी गई समयसीमा पर सवाल उठने लगे हैं। जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी में मौजूद तेल से भरे कुवैती टैंकर पर हमला किया, जिसमें आग लग गई।

इस बीच, ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुले बिना भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त कर सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह चार से छह सप्ताह की तय समयसीमा में अभियान समेटने के पक्ष में हैं।

नाटो देशों और ट्रंप के बीच एक बार फिर तनातनी बढ़ गई, जब स्पेन के बाद इटली ने भी अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे इस्तेमाल के लिए देने से साफ मना कर दिया। वहीं, फ्रांस ने इजरायल के लिए हथियार ले जानेवाले अमेरिकी परिवहन विमानों को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी।

नाटो देशों के रवैये से नाराज ट्रंप ने साफ कहा कि जिन्हें भी तेल की जरूरत है, वे हिम्मत दिखाएं और खुद होर्मुज जाकर तेल ले लें। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हमें बहुत अच्छी तरह पता है कि ईरान की मदद में रूस और चीन क्या कर रहे हैं।

युद्ध लंबा न खिंचे, इसलिए कदम खींच सकते हैं ट्रंप

पीटीआई के अनुसार, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप मानते हैं कि ईरान की नौसैनिक क्षमता और मिसाइल भंडार को कमजोर कर अमेरिका अपने मुख्य सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है। ऐसे में जलमार्ग खोलने की लंबी सैन्य कार्रवाई के बजाय आगे कूटनीतिक दबाव के जरिये व्यापार बहाली पर जोर दिया जा सकता है।

इसके अलावा जलमार्ग को बलपूर्वक खोलने की कोशिश युद्ध को उनकी तय चार से छह सप्ताह की समयसीमा से आगे ले जाएगी। व्हाइट हाउस ने भी कहा है कि सैन्य अभियान की अवधि शुरू से सीमित रखी गई थी। वहीं ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर नाटो देशों को निशाने पर लिया।

उन्होंने लिखा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज जलमार्ग से तेल नहीं ले पा रहे हैं, तो उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है। उन्होंने कहा कि जिसे भी तेल चाहिए उसे हिम्मत दिखानी होगी और होर्मुज को खुलवाकर तेल खरीदना चाहिए। ट्रंप ने ये भी कहा कि अब देशों को खुद अपनी लड़ाई लड़ना सीखना होगा।

अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए थे। रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका-इजरायल ने मंगलवार तड़के ईरान पर हमलों की नई लहर शुरू की, जिसमें तेहरान के साथ इस्फहान क्षेत्र को भी निशाना बनाया गया। ट्रंप द्वारा साझा वीडियो में इस्फहान में बड़े विस्फोट दिखाई दिए, हालांकि ईरान ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

उपग्रह चित्रों से संकेत मिले हैं कि हमलों से ठीक पहले अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम से भरे 18 कंटेनरों वाला ट्रक एक परमाणु केंद्र की सुरंग में पहुंचाया था। विश्लेषकों का मानना है कि इसमें 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम का बड़ा भंडार हो सकता है। ये जगह मंगलवार को हुए हमले से 20 किलोमीटर दूर बताई गई है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरानी ड्रोन ने कुवैत के तेल टैंकर अल साल्मी को दुबई के तट के करीब निशाना बनाया। इसमें से भीषण आग की लपटें उठती देखी गईं। तेल के रिसाव की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि न तो रिसाव हुआ है, न कोई हताहत हुआ।

टैंकर ट्रैकर्स डॉट कॉम के अनुसार, ये जहाज चीन के क्विंगडाओ जा रहा था और इस पर 12 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल और आठ लाख बैरल कुवैती कच्चा तेल भरा हुआ था। वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि इस जहाज के बगल में खड़े इजरायली गठजोड़ वाले कंटेनर जहाज पर हमला किया गया था। दुबई में ही एक आवासीय इलाके में ड्रोन का मलबा गिरने से चार लोग घायल हो गए।

बहरीन में भी सायरन पूरे दिन बजते रहे, जबकि सऊदी अरब ने राजधानी रियाद की तरफ आ रही तीन बैलिस्टिक मिसाइलें इंटरसेप्ट करने का दावा किया। इजरायल में भी ईरानी मिसाइलों की बौछार के चलते पूरे दिन तेज धमाके सुने गए। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हमले तेज किए और कहा कि इस इलाके में मौजूद एक-एक घर को नष्ट किया जाएगा। इजरायल के चार सैनिक लेबनान में मारे गए हैं।

वहीं ईरान के उत्तर पश्चिम शहर जांजान में एक समागम स्थल पर हुए हमले में तीन लोगों के मारे जाने की खबर है। इजरायली सेना ने कहा कि उसने रातभर तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल विस्फोटक फैक्ट्री, हथियार अनुसंधान केंद्रों और मिसाइल लांच प्रणालियों पर हमले किए।

ईरान ने एक बार फिर धमकाया

एएनआई के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड के खातम अल अनबिया मुख्यालय ने एक बार फिर अमेरिका को जमीनी सैन्य अभियान को लेकर चेतावनी दी है। प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने कहा कि ईरान की जमीन पर कदम रखनेवाले किसी भी आक्रांता की टांगें काट दी जाएंगी।

वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने देश पर हमले को बड़ी गलती बताया है। उन्होंने कहा कि दुश्मन को बहुत तगड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरान में संसद की सुरक्षा समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य प्रबंधन योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत तेल टैंकरों से टोल वसूला जाएगा। ईरान पहले ही कह चुका है कि होर्मुज जलमार्ग में कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा।

ओमान के सहयोग से ईरान इस जलमार्ग के लिए नया कानूनी ढांचा तैयार कर रहा है। इसमें ईरान के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंधों में शामिल देशों के आवागमन पर रोक भी शामिल है। ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिका के जमीनी सैन्य अभियान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए रूस के चेचेन विद्रोही भी इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी है।

चीन-पाकिस्तान की पांच सूत्रीय युद्धविराम योजना

एपी के अनुसार, चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बी¨जग में बैठक के बाद एक पांच बिंदुओं वाली योजना जारी की है। इस योजना का मकसद ईरान युद्ध को रोकना है। इसमें कहा गया है कि लड़ाई तुरंत रोकी जाए और युद्ध को आगे न बढ़ाया जाए।

जल्दी से जल्दी शांतिवार्ता शुरू हो, सभी देशों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। आम लोगों और नागरिक ठिकानों पर हमले बंद हों। होर्मुज जलमार्ग के समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जाए। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक शांति समझौता हो।

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