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संगम नगरी में 2,300 रुपये कुंतल वाला धान 1,650 की दर से बेचने को किसान मजबूर

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। रमईपुर के उमेश पटेल ने करीब आठ बीघे में धान की फसल लगाई थी। अच्छे मुनाफे की लालसा में सामान्य से 50 रुपये प्रति किलो महंगा बीज बोया था। सिंचाई, निराई, दवाई आदि में करीब आठ से 10 हजार रुपये प्रति बीघा खर्च किए। 14 से 15 क्विंटल प्रति बीघे उत्पादन की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन बारिश ने सब सत्यानाश कर दिया। पांच से छह क्विंटल उत्पादन घट गया। जो फसल हुई भी तो उसमें कालापन था। सरकारी रेट 2,369 रुपये है, लेकिन मजबूरन 1,650 रुपये में उपज बेचनी पड़ी।

गंगापार व यमुनापार के किसानों को नुकसान

यह समस्या जनपद के हर उस किसान की है, जिसने धान की फसल लगाई थी। गंगापार व यमुनापार में लगभग 1,81,280 हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई थी। पककर खड़ी फसल किसानों के घर पहुंचती, इससे पहले ही अंतिम दौर में बेमौसम बारिश आफत बनकर आ गई।

40 हजार आमदनी की उम्मीद टूटी 

कौंधियारा के प्रगतिशील किसान मान सिंह ने बताया कि एक बीघे में लगी काला नमक धान की फसल कटकर खेत में पड़ी थी। इस पूरे खेत में धान फिर से उग आया था। स्थिति देख इस फसल की मड़ाई ही नहीं कराई। यह धान सामान्य से कई गुना अधिक महंगा बिकता है। आठ क्विंटल उपज से करीब 40 हजार की आमदनी की उम्मीद थी। एक दाना भी इस खेत से नहीं निकला।

कृषि विभाग व प्रशासन उदासीन 

कौंधियारा के रमेश दुबे, अमित पाल सिंह, बारा के राकेश त्रिवेदी और करछना के बजरंग प्रसाद ने बताया कि जितनी फसल कटी हुई पड़ी थी, वह लगभग पूरी तरह से खराब हो गई। वहीं गिरी हुई फसल की गुणवत्ता भी बारिश ले डूबी। किसी ने 1,500 तो किसी ने 1,700 रुपये प्रति क्विंटल धान बेचा है। जबकि, सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। कृषि विभाग या प्रशासन की ओर से किसानों को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

किसानों का दर्द 

डेढ़ बीघा फसल कटी पड़ी थी, जो पूरी तरह से बर्बाद हो गई। धान इतना खराब हो गया था कि व्यापारियों ने लिया ही नहीं। उसे खेतों में फेंकना पड़ा। इसकी मड़ाई का पैसा भी फिजूल चला गया। शेष फसल में भी 10 फीसद तक उत्पादन कम हुआ।

- राजेंद्र प्रसाद, शांति नगर, कौंधियारा

करीब ढाई बीघे धान लगाया था। पूरी फसल बारिश में भीग गई थी। एक तो 10 से 12 क्विंटल उत्पादन कम हुआ। दूसरे, जो उपज निकली भी तो उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं थी। व्यापारी लेने को तैयार नहीं थे। बड़ी मुश्किल से 1700 रुपये में धान बिका है।

- लाल जी पटेल, मरुआ, जसरा

फसल का बीमा कराने वाले किसानों को मिलेगा लाभ

उप कृषि निदेशक पवन कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि कृषि विभाग की ओर से बारिश में हुए नुकसान का कोई सर्वे नहीं कराया गया था। जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया था, उन्हें नियमानुसार लाभ मिलेगा।

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