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10-10 लाख रुपये में बेची डॉक्टर की फर्जी डिग्री, प्रयागराज पुलिस की गिरफ्त में आया सरगना

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। अगर आप किसी गली-मुहल्ले में स्थित क्लीनिक से इलाज करवा रहें हैं तो उस डॉक्टर की डिग्री के बारे में जरूर जान लें। कहीं ऐसा न हो कि आपको बीमारी की दवा देने वाले डाक्टर की डिग्री ही फर्जी हो। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने ऐसे ही एक अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना मो. तारुक को गिरफ्तार किया है, जो 10-10 लाख रुपये में डाक्टर की फर्जी डिग्री, मार्कशीट बेच रहा था।

चौंकाने वाली बात यह है कि तारुक खुद भी फर्जी डिग्री के जरिए करेली में सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेंटर के नाम से क्लीनिक चलाकर इलाज करता था। उसने अपने और अपनी बीवी राशिदा परवीन के लिए इंस्टीट्यूट आफ इलेक्ट्रो होमियोपैथी मेडिकल रिसर्च डेवलपमेंट आफ इंडिया और उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून के नाम से बीएएमएस की फर्जी डिग्री व मार्कशीट बनायी थी।

करेली के जीटीबी नगर मुहल्ला निवासी तारुक पिछले चार से विभिन्न राज्यों के मेडिकल संस्थानों की बीएएमएस की फर्जी डिग्री, मार्कशीट बनाकर बेचने का काम कर रहा था। उसके कब्जे से 68 अदद मार्कशीट व सर्टिफिकेट, कंप्यूटर, मोबाइल, पेनड्राइव बरामद किया गया है।

बताया गया है कि मीरजापुर के जिगना, बौदई बिसहड़ा निवासी ब्रम्हानंद ने करीब डेढ़ माह पहले एसटीएफ को लिखित शिकायत दी थी, जिसमें मो. तारुक पर फर्जी डिग्री देने का आरोप लगाया था। एसटीएफ के डिप्टी एसपी शैलेश प्रताप ने इंस्पेक्टर जय प्रकाश राय के नेतृत्व में दारोगा गुलजार सिंह को जांच सौंपी। जांच में पता चला कि यूपी सहित कई राज्य में स्थित मेडिकल संस्थानों की बीएएमएस की फर्जी डिग्री, मार्कशीट, प्रमाणपत्र तैयार करके लोगों से लाखों रुपये लिए गए हैं।

शिकायतकर्ता ब्रम्हानंद को शिवालिक आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज बिजरया आजमगढ़, वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय जौनपुर के नाम बीएएमएस की फर्जी मार्कशीट और डिग्री दी गई, जिसके लिए कई बार में छह लाख रुपये लिए गए। साक्ष्य मिलने पर विवेचक दारोगा गुलजार सिंह, हेड कांस्टेबल प्रभंजन पांडेय, अजय, सोनू, अनूप, कमांडो नासिर सहित अन्य के साथ तारुक के सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेंटर स्थित कार्यालय पर पहुंचकर दबोच लिया।

पूछताछ में उसने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए फर्जी डिग्री बनाकर बेचने की कहानी बयां कर दी। तब उसके खिलाफ करेली थाने में मुकदमा लिखा गया। एसटीएफ इंस्पेक्टर जेपी राय ने बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

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