हिंदू धर्म में जिस तरह पुरुष नागा साधु होते हैं वैसे ही महिला नागा साधु भी होती हैं। महिला नागा साधु बनने के लिए महिलाओं को कड़ा तप करना होता है. उन्घ्हें कठिन परीक्षाओं से गुजरना होता है। महिला नागा साधुओं की परीक्षा कई साल चलती है। वे सख्घ्त ब्रह्मचर्य नियमों का पालन करती हैं फिर जिंदा रहते हुए ही अपना पिंडदान करती हैं, अपना सिर भी मुंडवाती हैं। इसके बाद पवित्र नदी में स्नान करती हैं तब जाकर उन्घ्हें महिला नागा साधु का दर्जा मिलता है...
खास मौके पर ही नजर आती हैं महिला नागा साधु
महिला नागा साधु बहुत दुर्लभ मौकों पर ही नजर आती हैं। यह आम जनजीवन से बहुत दूर घने जंगलों, पहाड़ों, गुफाओं में ही रहती हैं और पूरा समय भगवान की भक्ति में ही लगाती हैं। वे जंगल-पहाड़ों से बाहर निकलकर दुनिया के सामने कम ही आती हैं। आमतौर पर महिला नागा साधु केवल कुंभ या महाकुंभ में ही नजर आती हैं और फिर अचानक से गायब भी हो जाती हैं। हालांकि पुरुष नागा साधु भी कम ही नजर आते हैं लेकिन महिला नागा साधुओं का दुनिया के सामने आने के मौके उससे भी कम होते हैं।
पुरुष नागा साधु सार्वजनिक तौर पर भी नग्न ही नजर आते हैं। हालांकि महिला नागा साधुओं को नाम जरूर नागा साधु का दिया जाता है लेकिन वे निर्वस्त्र नहीं रहती हैं। अधिकांश महिला नागा साधु वस्त्रधारी होती हैं और केवल गिरवी रंग का बिना सिला हुआ वस्त्र धारण करती हैं। ये गेरुए रंग का कपड़े का टुकड़ा रहता है, जिसे वे अपने शरीर के कुछ हिस्घ्सों पर लपेटे रहती हैं।
साथ ही महिला नागा साधु अपने माथे पर तिलक लगाती हैं और अपने शरीर के कई हिस्सों पर भस्म भी लगाए हुए रहती हैं। महिला नागा साधुओं को हिंदू धर्म में बहुत सम्मान दिया जाता है और इन्हें माता कहकर बुलाया जाता है।
1. जो व्यक्ति नागा साधु बनना चाहता है उसके अखाड़े में प्रवेश के बाद उसके ब्रह्मचार्य की परीक्षा ली जाती है। इसमें 6 महीने से 12 साल तक लग सकते है। जब अखाड़े और उसके गुरू को ये लगता है कि वो दीक्षा देने लायक हो चुका है तो उसे अगली प्रक्रिया में ले जाया जाता है. 2. नागा साधु बनते समय साधु को अखाड़े के ध्वज के नीचे 24 घंटे तक नंगा खड़ा रहना पड़ता है उसके बाद वरिष्ठ नागा साधु लिंग की एक विशेष नस को खींचकर उसे नपुंसक कर देते है। इसके बाद वह नागा दिगंबर साधु बन जाता है.
3. ऐसा नही है कि सिर्फ पुरूष ही नागा साधु बनते है बल्कि महिलाएँ भी नागा साधु है खासकर विदेशी महिलाएँ.
4. नागा साधु बनने के लिए सबसे पहले अपने बाल कटवाने पड़ते है फिर गंगा में 108 डुबकी लगाते है और उसके पाँच गुरू बनाए जाते है। उसके बाद खुद को अपने परिवार और समाज के लिए मृत मानकर अपने हाथों से अपना श्राद्ध कर्म पूरा करना होता है। ये पिंडदान अखाड़े के पुरोहित करवाते है.
5. दीक्षा के लायक होने के बाद साधुओं को एक गुरूमंत्र दिया जाता है उसकी भविष्य की सारी तपस्या इसी गुरू मंत्र पर आधारित होती है.
6. नागा साधु बनने के बाद वस्त्रो का त्याग करना पडता है अगर वस्त्र डालने ही है तो गेरूए रंग का सिर्फ एक वस्त्र डाल सकते है. महिला नागा साधु को नग्न रहने की अनुमति नही है. 7. नागा साधु की ट्रेनिंग किसी कमांडो से कम नही होती। नागाओं को सिर्फ साधु नहीं, बल्कि योद्धा माना गया है। अक्सर नागा साधु अपने साथ तलवार, फरसा या त्रिशूल लेकर चलते है.
8. खाट, पलंग तो छोड़ो नागा साधु गद्दी पर भी नही सो सकते। ये केवल जमीन पर सोते है.
9. नागा साधु हमेशा बस्ती से बाहर निवास करते है, ये सन्यासी को छोड़कर किसी का प्रणाम नही कर सकते और ना ही किसी की निंदा कर सकते है.
10. नागा साधु दिन में सिर्फ एक ही समय भिक्षा मांगकर भोजन करते है. ये ज्यादा से ज्यादा सात घरों में भिक्षा माँग सकते है। अगर सातों घरों से कोई भिक्षा ना मिले तो इन्हें पूरा दिन भूखा रहना पड़ता है.
11. नागा साधुओं को सुबह स्नान के बाद सबसे पहले शरीर पर भस्म लगानी होती है और रूद्राक्ष धारण करना पड़ता है. 12. नागा साधु अपने तिलक पर बहुत ज्यादा ध्यान देते है कोशिश रहती है कि हर रोज एक जैसा तिलक लगे. 13. नागा साधु को अपने पास चिमटा रखना जरूरी होता है क्योकिं धुनी रमाते समय सबसे ज्यादा काम चिमटे का ही पड़ता है. चिमटा साधुओं के व्यक्तित्व का अहम हिस्सा होता है.
14. साधुओं में भी पद और अधिकार होते है और इनके पद बदलते रहते है जैसे नागा साधु के बाद महंत, श्रीमहंत, जमातिया महंत, थानापति महंत, पीर महंत, दिगंबर श्री, महामंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर.
15. अक्सर नागा साधुओं को कुंभ के मेले में देखा जाता है। जैसे ही कुंभ का मेला खत्म होता है ये रातों रात गायब हो जाते है। ये जंगल के रास्ते ही अपना सफर पूरा करते है.
कुम्भ का मेला और नागा साधु न नजर आएं ये हो नहीं सकता। पहला शाही स्नान का हक तो इन्हीं का है। बाद में महामंडलेश्वरों को भी हक मिलता हैं। सिर्फ कुम्भ के मेले में ही इनके दिव्य दर्शन होते हैं। नागा साधु भगवान शिव के प्रिय भक्त होते हैं और उन्ही को अपना परम गुरू मानते हैं। लेकिन क्या सिर्फ पुरुष नागा साधु ही होते हैं, महिला नागा साधु नहीं होती हैं।
यहां हम महिला नागा साधुओं के बारे में ही जानने की कोशिश करेंगें
१) महिला को दीक्षा देने से पहले कम से कम 6 साल तक कठिन बृह्मचर्य का पालन करना होता है। २) सन्यासिन बनने से पहले महिला को ये साबित करना होता है कि उसका परिवार और समाज से कोई मोह नहीं है। वह सिर्फ भगवान की भक्ति करना चाहती है।
३) महिला नागा सन्यासिन बनाने से पहले उसके पिछले जीवन की पूरी जांच-पड़ताल की जाती है।
४) हर महिला को खुद का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है यानि इस जीवन का समापन और नए जीवन का आरम्भ।
५) अखाड़े के आचार्य महामंडलेष्वर खुद ही उसे दीक्षा देते है।
६) सन्यासिन बनने से पहले उसका मुंडन होता है और उसको नदी में स्नान करना होता है।
७) एक बार महिला नागा बनने के बाद उसे अखाड़े की परम्परा का पालन करना होता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना होता है। नित्य कर्माे के बाद से ही शिवजी का जप शुरु हो जाता है दोपहर में भोजन करतीं हैं फिर दिन भर शिव जी का जप और शाम को दत्तात्रेय भगवान की पूजा और इसके बाद शयन।
८) अखाड़े में सन्यासिन को भी पूरा सम्मान दिया जाता है।
९) सिंहस्थ और कुम्भ में नागा साधुओं के साथ ही महिला सन्यासिन भी शाही स्नान करती है।
१०) महिला नागा सन्यासिन को सभी माता कहकर सम्बोधित करते है।
११) महिला नागा सन्यासिन माथे पर तिलक और सिर्फ पीला या भगवा चोला धारण करती है।
१२) महिला नागा साधू को वस्त्र लपेट कर ही स्नान करना पड़ता है। नग्न स्नान की अनुमति नहीं है, यहाँ तक की कुम्भ मेले में भी नहीं।
पुरुष नागा साधु और महिला नागा साधु को सबसे पवित्र माना जाता है इनका जीवन कठिन होता है और तपस्या भयंकर वाली। नागा साधु तो घोर सर्दी में भी नग्न ही रहते हैं। इनका रूप कठिन जीवन परस्थियों में रहने के कारण और तपस्या के कारण डरावना सा हो जाता है।