हे कीर्तिशेष आपको शत् शत् नमन
प्रयागराज (राजेश शुक्ल)। राजनीति के जगत में एक सुनहरा अध्याय समाप्त हो गया है। रमेश चन्द्र पाण्डेय, जिनकी मानवता और जनसेवा की मिसालें आज भी गूंज रही हैं, अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका निधन केवल एक
माण्डा विकास खंड के एक छोटे से मजरे सैबसा के जमींदार रहे पंडित बृज नारायण पाण्डेय-श्रीमती जयराजी पाण्डेय के छह पुत्रों में द्वितीय पुत्र श्रीमती शोभा पाण्डेय की मांग के सिंदूर अस्सी के दशक में प्रयागराज की राजनीतिक सरजमीं की बहुचर्चित राजनेता डॉक्टर राजेन्द्री बाजपेई के आंगन से अशोक बाजपेई के साथ राजनीतिक ककहरा सीखकर इलाहाबाद मंडल के लाखों दिलों में आप फलक के अनमोल सितारे बनकर जो उभरे तो सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की आंख के बेदाग तारे बन गये। लोकसभा चुनाव में दो लाख 97 हजार 461 मतों से विजय श्री प्राप्त करने के पश्चात अमिताभ बच्चन ने चुनाव संचालक रमेश चन्द्र पाण्डेय को इलाहाबाद मंडल विकास निगम इलाहाबाद का चेयरमैन पद से नवाजा था। दर्जा राज्य मंत्री बनने के पश्चात भी श्री पाण्डेय की जनसेवा की रफ्तार धीमी होने के बजाय और भी तेज होती गई थी।
यमुनापार के माण्डा विकास खंड के जमींदार रहे स्वर्गीय पंडित बृज नारायण पाण्डेय और श्रीमती जयराजी पाण्डेय के सुपुत्र, रमेश चन्द्र पाण्डेय का जन्म सैबसा मजरे में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद के राजनीतिक परिदृश्य में अपने कार्यों से एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष से लेकर इलाहाबाद मंडल विकास निगम के चेयरमैन तक, उनकी यात्रा किसी प्रेरणा से कम नहीं थी। उनके नेतृत्व में, कांग्रेस ने कई महत्वपूर्ण चुनावों में विजय प्राप्त की, और वे सदैव अपनी जनता के साथ खड़े रहे। “उनकी सबसे बड़ी खासियत थी, उनके शब्दः ‘परेशान मत हों, अभी मैं हूं।’ यह शब्द उनके व्यक्तित्व का सार था। वे हमेशा संकट के समय में अपने लोगों के साथ खड़े रहते थे,” उनके करीबी मित्र और राजनीतिक सहयोगी, अनिल द्विवेदी ने कहा। उनके इस संदेश ने न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं को बल्कि आम जनता को भी एक नई दिशा दी। रमेश चन्द्र पाण्डेय का जीवन केवल राजनीतिक उपलब्धियों से नहीं भरा था, बल्कि उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कई शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की शुरुआत की, जिससे हजारों लोगों को लाभ हुआ। उनके कार्यों ने उन्हें न केवल एक नेता बल्कि एक संरक्षक का दर्जा भी दिलाया। हालाँकि उनके निधन से जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ताओं में एक शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन उनके कार्यों का प्रभाव सदैव बना रहेगा। “रमेश जी ने हमें यह सिखाया कि राजनीति केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह लोगों की सेवा का एक माध्यम होना चाहिए।” उनका निधन एक ऐसा क्षण था जिसने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राजनीतिक समाज को हिला कर रख दिया। उनके योगदान और सेवा के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। रमेश चन्द्र पाण्डेय की आत्मा को शांति मिले, और वे हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे। किसे पता कि 07 फरवरी 2026 का उगता सूरज उनको ग्रसने के लिए उदय हो रहा है, सुबह के 07 बजे अपने अतिप्रिय चहेते साले कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल द्विवेदी और जेपी द्विवेदी के हाथ में अपने इकलौते पुत्र अजय पाण्डेय का हाथ सौंपकर उन्हीं के बाहों में सदा के लिए चिरनिंद्रा में लीन हो गए। हे कीर्तिशेष आपको शत् शत् नमन आप सदैव हमारे दिलों में स्थापित रहेंगे...। हम एक ऐसे नेता और अभिभावक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी को जनसेवा के लिए समर्पित करते हुए कांग्रेस में ही अपनी आस्था और प्रतिष्ठा बनाये रखी। हे कीर्तिशेष, आपको शत्-शत् नमन।