मांडा, प्रयागराज (शशिभूषण द्विवेदी)। आजीवन शहरी रहन रहन और बड़े नेताओं से मधुर संबंध के बावजूद भी गांव की माटी, परिपाटी और संस्कार से जुड़े रहने तथा दलगत , जातिगत व वैमनस्य की राजनीति से दूर, आजीवन बिना किसी प्रलोभन कांग्रेस से ही जुड़े रहने के कारण रमेश चंद्र पांडेय समूचे यमुनापार में एक अलग छवि के राजनेता थे। उनके निधन से समूचे क्षेत्र का अपूरणीय नुकसान हुआ है।
मांडा विकास खंड क्षेत्र के सैबसा गाँव निवासी, इलाहाबाद मंडल विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडेय के ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और दल के प्रति समर्पण के चलते कांग्रेस के अलावा अन्य दलों के राजनेताओं में भी वे लोकप्रिय थे। यही कारण है कि उनके निधन की खबर पर हर दल के राजनेताओं ने उनके आवास पर पहुँच कर उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी और विनम्र नमन किया। 1984 में जब इलाहाबाद में राजनीति के दिग्गज स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा सांसद के लिए चुनाव मैदान में आये और कांग्रेस ने उनके खिलाफ बहुचर्चित अभिनेता अमिताभ बच्चन को टिकट दिया, तो यमुनापार में अमिताभ बच्चन के चुनाव संचालक रहे रमेश चन्द्र पांडेय ने तन, मन और धन से प्रचार कर अमिताभ बच्चन को दो लाख 97 हजार 461 वोटों से विजयी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इलाहाबाद मंडल विकास निगम का अध्यक्ष बनने और लालबत्ती वाहन से चलने के समय भी उन्होंने गाँव के प्रति अपना लगाव कभी कम नहीं किया। मांडा क्षेत्र के प्रायः हर गांव और भारतगंज कस्बे में उनके तमाम चाहने वालों की आंखें उस समय नम देखी गई, जब उनके निधन की खबर मिली। डेंगुरपुर गंगाघाट पर उनके अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ ऐतिहासिक और उनके प्रति आत्मीय लगाव की एक झलक थी। लोगों में सिर्फ एक ही चर्चा थी कि अब शायद ही यमुनापार की मूंछ फहराने वाला कोई दूसरा रमेश चंद्र पांडेय मांडा को मिल सके। तमाम लोगों ने उनके सैबसा स्थित आवास पर पहुँच कर उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया।