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पुतिन के एक ऐलान से भारत में 1 लाख से भी नीचे चला जाएगा सोना!

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नई दिल्ली। एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस यूक्रेन युद्ध के खत्म होने के बाद रूस ने अमेरिका के साथ एक बड़ी डील करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। आपको बता दें कि 2022 में यूक्रेन जंग की शुरुआत के बाद रूस को ग्लोबल पेमेंट सिस्टम ैूपजि से बाहर निकाल दिया गया था।

भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के बाद अचानक कुछ ऐसा होने जा रहा है जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। रूस ने पूरी दुनिया को चौंकाते हुए अमेरिका को एक ऐसा ऑफर दिया है जिससे भारत और दुनिया में अचानक सोना सस्ता होना शुरू हो गया है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि रूस की वजह से 10 ग्राम सोना 1 लाख के नीचे तक पहुंच सकता है। इस होश उड़ा देने वाली कहानी को पीएम मोदी ने पहले से ही भांप लिया था। जिसका फायदा आने वाले दिनों में भारत को मिलना तय है। हालांकि यह खबर चीन को हिलाकर रख देगी। दरअसल खबर है कि रूस जल्द ही व्यापार के लिए दोबारा अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल शुरू कर सकता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस यूक्रेन युद्ध के खत्म होने के बाद रूस ने अमेरिका के साथ एक बड़ी डील करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। आपको बता दें कि 2022 में यूक्रेन जंग की शुरुआत के बाद रूस को ग्लोबल पेमेंट सिस्टम ैूपजि से बाहर निकाल दिया गया था। जिसके बाद रूस ने अपनी इकॉनमी को डॉलर से मुक्त करने के लिए चीन के युवान और भारतीय रुपए का सहारा भी लिया था। लेकिन इससे रूस को बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिला। रूस के लिए ऐसी नाजुक स्थिति में चीन ने बहुत बड़ा खेल करना शुरू कर दिया। चीन ने रूस पर डॉलर को पूरी तरह से बंद करने का दबाव बनाया जिसे डीडोलराइजेशन कहा गया था। हालांकि भारत ने कभी भी खुलकर डीडोलराइजेशन का समर्थन नहीं किया था। मगर अब पुतिन को समझ आ गया है कि अगर भारत यूरोप और दुनिया के बाकी देशों के साथ व्यापार करना है तो फिलहाल डॉलर पर लौटना ही पड़ेगा। 

इसीलिए रूस अपने रुख में एक ऐतिहासिक यू टर्न ले रहा है। भारत अमेरिका डील के बाद अब रूस और अमेरिका के बीच एक संभावित समझौते पर बातचीत चल रही है। इस संभावित समझौते के तहत रूस और अमेरिका फॉसिल फ्यूल, न्यूक्लियर एनर्जी, नेचुरल गैस, तेल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में पार्टनरशिप करेंगे। यह सब कुछ इसलिए किया जा रहा है कि दुनिया के दो सबसे बड़े एनर्जी प्रोड्यूसर्स देश यानी अमेरिका और रूस को कंपटीटर की जगह पार्टनर बनाया जाए। अब आप सोचिए कि भारत अगर चीन की तरह किसी एक को चुनता तो भारत को कितना बड़ा नुकसान होता। भारत ने जबरदस्त कूटनीति दिखाते हुए रूस के साथ भी व्यापार किया।

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