गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद जिला, जिसे कभी अपनी आपराधिक घटनाओं के कारण 'क्राइम कैपिटल' के रूप में जाना जाता था, आज विकास और कनेक्टिविटी के एक वैश्विक मॉडल के रूप में उभर रहा है। 2017 के बाद से शासन और प्रशासन में आए बदलावों ने इस शहर की न केवल छवि बदली है, बल्कि इसे निवेश के सबसे पसंदीदा केंद्रों में से एक बना दिया है।
विभाजन के दौर से शुरू हुआ औद्योगिक सफर
गाजियाबाद का औद्योगिक इतिहास भारत के विभाजन के समय से जुड़ा है। 1947 में जब देश आजाद हुआ, तब पाकिस्तान के मुल्तान से कई बड़े उद्योग विस्थापित होकर गाजियाबाद आए थे। यहीं से गाजियाबाद में उद्योगों की नींव पड़ी। दैनिक जागरण के गाजियाबाद ब्यूरो चीफ आदित्य त्रिपाठी ने बताया कि आज कानपुर के बाद गाजियाबाद उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र है, जहां के इंजीनियरिंग गुड्स न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी निर्यात किए जाते हैं। 2017 के बाद से यहाँ निर्यात का आंकड़ा 100 करोड़ से बढ़कर 500 करोड़ के पार पहुंच गया है।
अपराध के साये से मिली मुक्ति
आदित्य त्रिपाठी ने बताया कि एक समय था जब गाजियाबाद की पहचान गैंगवार और रंगदारी से होती थी। 2013 की फिल्म 'जिला गाजियाबाद' यहां की इसी छवि पर आधारित थी। व्यापारियों में इस कदर खौफ था कि वे निवेश करने से डरते थे। लेकिन 2017 के बाद कानून व्यवस्था पर कड़ा शिकंजा कसा गया। पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने और माफियाओं पर अंकुश लगने से उद्यमियों का भरोसा वापस लौटा है। अब शहर में रात 12 बजे भी लोग बेखौफ घूम सकते हैं और पुलिस की 'बीट व्यवस्था' ने सुरक्षा को मोहल्लों तक पहुंचा दिया है।
कनेक्टिविटी ने बदली शहर की रफ्तार
गाजियाबाद की बदलती सूरत में सबसे बड़ा योगदान कनेक्टिविटी का है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने मेरठ और दिल्ली के बीच के सफर को ढाई घंटे से घटाकर मात्र 45-50 मिनट कर दिया है। इसके अलावा, देश की पहली रैपिड रेल (नमो भारत) की शुरुआत भी गाजियाबाद से हुई, जिसने परिवहन के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। हिंडन एयरपोर्ट से विभिन्न शहरों के लिए शुरू हुई उड़ानों ने गाजियाबाद को हवाई मार्ग से भी जोड़ दिया है, जिससे निवेशकों और आम जनता को बड़ी राहत मिली है।
ग्रेटर गाजियाबाद: भविष्य की परिकल्पना
शहर के विस्तार के लिए अब 'ग्रेटर गाजियाबाद' की परिकल्पना पर काम हो रहा है। इसमें खोड़ा, लोनी, मुरादनगर और कनावनी जैसे क्षेत्रों को नगर निगम की सीमा में लाकर उन्हें विकसित करने की योजना है। 2027 तक यहाँ एक विशाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 53 एकड़ में फैला बायोडायवर्सिटी पार्क बनकर तैयार हो जाएगा। साथ ही, साहिबाबाद में एम्स का सैटेलाइट सेंटर बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
2047 की ओर बढ़ता कदम
गाजियाबाद अब सिर्फ एक औद्योगिक जिला नहीं, बल्कि एक 'प्राउड सिटी' बन गया है। 'एक जिला एक उत्पाद' के तहत यहाँ के इंजीनियरिंग गुड्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और कनेक्टिविटी में हुए सुधारों के कारण गाजियाबाद 2047 के 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
