सुख-समृद्धि को क्या करें दान...बता रहे ज्योतिर्विद भविष्यवक्ता व ज्योतिषाचार्य पंडित कमला शंकर उपाध्याय
प्रयागराज (राजेश सिंह)। माघी पूर्णिमा पर श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगा रहे हैं। गंगा तटों पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होने लगी थी। पवित्र स्नान करने वालों का संगम नोज पर तांता अल सुबह ही लग गया। रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है।
पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ पूरे माघ माह कल्पवास करने वाले श्रद्धालु आज माघ पूर्णिमा का स्नान कर अपने घरों की ओर प्रस्थान करेंगे। संगम नोज से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे अमर उजाला के वरिष्ठ रिपोर्टर मुनेंद्र वाजपेई के मुताबिक सुबह पांच बजे ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ स्नान के लिए उमड़ने नहीं थी। सुबह छह बजे तक लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में स्नान कर चुके थे।
माघ मेले के पांचवें स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर रविवार को श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। मुहूर्त सुबह से देर रात तक का है। पूर्णिमा स्नान के साथ कल्पवास का संकल्प भी पूरा हो जाएगा। एक महीने से टिके कल्पवासी संगम की रेती ले विदा होंगे। सोमवार से गंगा तट पर वही रह जाएंगे, जिन्होंने संक्रांति से कल्पवास आरंभ किया है। ऐसे श्रद्धालु महाशिवरात्रि तक क्षेत्र में रहेंगे।
प्रशासन का दावा है कि पूर्णिमा पर 50 से 70 लाख श्रद्धालु 24 घाटों पर स्नान करेंगे। यह आंकड़ा एक करोड़ के पार भी जा सकता है। कल्पवासियों के शिविरों में रविवार को सत्यनारायण कथा होगी। इससे पहले कई शिविरों में रामचरितमानस का अखंड पाठ शुरू हुआ, जिसका समापन भंडारे के साथ रविवार को होगा।
माघ शुक्लपक्ष की पूर्णिमा अर्थात माघ पूर्णिमा स्नान पर्व से संगम की रेती से संत और श्रद्धालु प्रस्थान करने लगेंगे। माघ मेला के पांचवे स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर रविवार को संगम और गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाने के बाद लोग जाने लगेंगे। इसके चलते शिविर उखड़ने लगे हैं।
तुलसी का बिरवा, जौ का पौधा लेकर जाएंगे कल्पवासी
शिविर में रहने वाले लोग सामान समेटने में जुटे हैं। कल्पवासियों को लेने उनके सगे-संबंधी मेला क्षेत्र पहुंच रहे हैं। कल्पवासी स्नान के बाद पूर्वजों और आराध्य को नमन करके प्रसाद स्वरूप तुलसी का बिरवा और जौ का पौधा लेकर अगले वर्ष आने का संकल्प लेकर प्रस्थान करेंगे। इसके साथ संगम तट पर चल रहे यज्ञ-अनुष्ठान पर विराम लग जाएगा। वहीं, कुछ संत और श्रद्धालु 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का स्नान करने के बाद जाएंगे।
रविपुष्य योग दिनभर रहेगा
भविष्यवक्ता व ज्योतिषाचार्य पंडित कमला शंकर उपाध्याय के अनुसार एक फरवरी की सुबह 5.19 बजे पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। जो उक्त तारीख की रात 3.46 बजे तक रहेगी। रविपुष्य का योग दिनभर रहेगा। वहीं, मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य के संचरण से चतुर्ग्रहीय संयोग बन रहा है। जो अत्यंत पुण्यकारी है। एक फरवरी की शाम 6.05 बजे शुक्रोदय होगा। इसके साथ शादी-विवाह सहित समस्त शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे।
स्नान-दान से ब्रह्मलोक की होगी प्राप्ति
भविष्यवक्ता व ज्योतिषाचार्य पंडित कमला शंकर उपाध्याय के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान का विशेष महत्व है। मत्स्य पुराण में वर्णन है कि माघ मास की पूर्णिमा तिथि पर स्वर्ग लोक से देवता पृथ्वी पर आते हैं। वे मनुष्य के स्वरूप में संगम में स्नान करते हैं। संगम व गंगा के पवित्र जल में स्नान करके गरीबों को भोजन, वस्त्र, गुड़, कपास, देशी घी, फल व अन्न दान करने वालों को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। जीवन में सुख-समृद्धि आती है। माघी पूर्णिमा पर स्नान के बाद जल ग्रहण करना चाहिए। आहार, विहार व आचरण शुद्ध रखें। रात में जल में सफेद फूल डालकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से मनोवांछित फल की प्राप्त होती है।
