प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 15 वर्षीय गर्भवती बेटी और उसके 28 वर्षीय प्रेमी की आनर किलिंग करने वाले दंपती की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
दंपती की अपील खारिज करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर लिए ‘बुरा सपना’ (नाइटमेयर) है, जो अक्सर हिंसक प्रतिक्रियाओं को आमंत्रित करता है। आरोपित ने अपनी बेटी के प्रेम संबंधों के कारण उनकी हत्या कर दी, जो भारतीय समाज में आम बात है।
आरोपितों ने हत्या के बाद शवों को छिपाने की कोशिश की, जो उनके अपराध को साबित करता है।’ फिलहाल जमानत पर चल रही लड़की की मां को कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर सीजेएम कोर्ट में समर्पण का आदेश दिया है। पत्नी व पति की अपीलें साथ ही सुनी गई थीं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक न्यायालय संख्या शाहजहांपुर के 18 फरवरी 2020 के निर्णय और आदेश को जेल से की गई अपील में चुनौती दी गई थी। अपीलकर्ताओं को भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 302/34 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है और उनमें प्रत्येक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। जुर्माना न भरने की स्थिति में छह महीने साधारण कारावास का आदेश दिया गया था।
2014 में दर्ज हुई थी रिपोर्ट
घटना की रिपोर्ट 20 अगस्त 2014 को थाना कलान में दर्ज कराई थी। मारे गए युवक (प्रेमी) के भाई ने यह रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
कोर्ट ने पाया कि अभियुक्तों के पास अपराध करने का उद्देश्य (माटिव) था और उनके वकील की दलील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा, सबसे अहम सवाल यह है कि किस मकसद ने अपीलकर्ताओं को अपनी ही बेटी की जान लेने के लिए मजबूर किया?
माता-पिता पर बच्चे की हत्या का संदेह होने की संभावना सबसे कम होती है। फिर भी, कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनका व्यवहार विकृत होता है और वे असामान्य कदम उठा सकते हैं। समाज में ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो खास तरह की परिस्थितियों में अपने बच्चे की जान ले सकते हैं।