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‘ईरान को मिटाना जरूरी, लंबी जंग के लिए तैयार’

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इजराइल में खतरे के अलार्म, भारतीय बोले- मिसाइलों की आदत हो गई, ईरान में स्टूडेंट फंसे

नई दिल्ली। इजराइल के तेल अवीव में रहने वाले ईटान टाइगर एक्टिविस्ट हैं। 28 फरवरी की सुबह उनकी नींद सायरन की तेज आवाज के साथ खुली। वे उठे और सेफ हाउस की तरफ भागे। सेफ हाउस में पहुंचकर मोबाइल चेक किया। पता चला कि इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है। ईटान समझ गए कि ये सायरन ईरान के जवाबी हमले से बचने के लिए है।

इजराइल की तरह ही ईरान में भी जंग का डर है। कुम शहर में रहने वाले मोहम्मद हुसैन बताते हैं कि देश की इंटेलिजेंस एजेंसी ने कहा है जंग लंबी चलने वाली है। इसके लिए तैयार रहना है। स्कूल-कॉलेज बंद हैं। लोगों से कहा गया है कि आर्मी पर भरोसा रखें। हमला करने वालों को जवाब दिया जाएगा।

28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने ईरान के 10 शहरों पर एयरस्ट्राइक की है। जवाब में ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागीं। उसने इजराइल के अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। दैनिक भास्कर ने दोनों देशों के लोगों से बात कर वहां के हालात जाने।

जगह: तेल अवीव, इजराइल

इजराइल पर ईरानी हमले के बाद तेल अवीव में लोग बंकरों में रह रहे हैं। ईटान टाइगर बताते हैं कि होम कमांड से हमें कुछ-कुछ देर में अलर्ट मिल रहे हैं। हालांकि, यहां हालात ठीक हैं। अब तक मिसाइल गिरने या नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।

ईटान आगे कहते हैं, ‘अमेरिका और इजराइल मिलकर सबसे बड़े दुश्मन ईरान को खत्म करने के लिए लड़ रहे हैं। ईरान सिर्फ इजराइल के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। उसकी बैलेस्टिक मिसाइल 4 हजार किमी तक जा सकती हैं। अब ईरान यूरोपीय देशों तक हमला कर सकते हैं। अक्टूबर 2023 के बाद से हम लगातार जंग के साए में जी रहे हैं। हमास के बाद हिजबुल्ला से लड़ाई लड़ी है।’

ईटान हमले की तारीख चुनने के पीछे की वजह बताते हैं। कहते हैं कि यहूदी बहुत पुराना धर्म है। हमारी परंपराएं भी पुरानी हैं। हमारे यहां दो दिन बाद पूरिम फेस्टिवल मनाया जाने वाला है। ये खुशी का त्योहार है, जो बाइबिल की एस्तेर की कहानी पर आधारित है।

इसके मुताबिक, फारस (ईरान) में यहूदियों को खत्म करने की साजिश रची गई थी। रानी एस्तेर और उनके चाचा मोर्दकै की वजह से यह साजिश नाकाम हो गई और यहूदी समुदाय बच गया। इसी खुशी में पूरिम फेस्टिवल मनाया जाता है।

इजराइल में रह रहे भारतीय बोले- हमें भी जंग की आदत हो गई

विकास यादव उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले हैं। तेल अवीव के पास लोद सिटी में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं। इजराइल में रहते हुए करीब 2 साल हो गए। 28 फरवरी की सुबह विकास की नींद अलार्म से नहीं बल्कि सायरन से खुली। पूरे तेल अवीव में अलर्ट अलार्म बज रहे थे। इमरजेंसी अलार्म बजते ही लोगों को बमों से बचाने वाले सेफ हाउस में जाना होता है।

इजराइल के वक्त के मुताबिक, सुबह करीब 8.30 बजे इजराइल ने ईरान पर हमला किया। इसके साथ ही तेल अवीव में अलार्म बजने लगे। अलार्म सुनते ही विकास ने सेफ हाउस की तरफ दौड़ लगा दी। अलार्म बजने और सेफ हाउस तक पहुंचने के लिए कुछ मिनट का ही वक्त होता है। इतने वक्त में ही सेफ हाउस में जाना होता है।

विकास कहते हैं कि सुबह से शाम तक कई बार यही ड्रिल करनी पड़ी। पूरा दिन सेफ हाउस में पहुंचने और लौटने में बीत गया।’

‘ईरान का पिछला हमला ज्यादा खतरनाक था’

इजराइल में करीब 30 हजार भारतीय कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं। गाजा पर हमले के बाद से फिलिस्तीन के मजदूरों का इजराइल में आना बंद हो गया। इस वजह से इजराइल ने बड़े पैमाने पर भारतीयों को काम देना शुरू किया।

विकास कहते हैं कि मेरे इजराइल आने के बाद ईरान के साथ संघर्ष हुआ था। तब ज्यादा बड़ा हमला हुआ था। एक दिन में 300 मिसाइल तक आती थीं। इस बार ईरान का अटैक उतना मजबूत नहीं लग रहा है। इस बार ईरान का टारगेट सिर्फ इजराइल नहीं है, बल्कि कई सारे ठिकाने है। ये भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। इजराइल का आयरन डोम इतना मजबूत है कि मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर देता है। हम लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं।

इजराइल में रहने का अनुभव साझा करते हुए विकास कहते हैं कि इजराइली लोग दिमागी तौर पर बहुत मजबूत होते हैं। ये ऐसे हालात में रहने के आदी हो गए हैं। उन्हें जंग की स्थिति में खुद को बचाने की आदत हो चुकी है। इजराइल में रहने वाले भारतीय अभी सुरक्षित हैं। हम यहां ठीक हैं, अभी सरकार से वापस बुलाने की मांग नहीं करना चाहते।

विकास आगे कहते हैं, ‘मैंने गाजा में हमास से, लेबनान में हिजबुल्ला से, यमन में हूती से और ईरान से जंग देख ली है। इजराइल में रहते हुए मैं इन सबका आदी हो गया हूं। आगे क्या होगा, मुझे भी नहीं पता, लेकिन यही कह सकता हूं कि अभी तो डर नहीं लग रहा है।’

मोहम्मद हुसैन सूरतवाला ईरान की अल मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वे बताते हैं, ‘भारत और ईरान के ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं। बड़ी तादाद में भारतीय ईरान जाते हैं। भारतीय स्टूडेंट मेडिकल, इस्लामिक स्टडीज के लिए पढ़ाई करने और बाद में नौकरी करने के लिए जाते हैं। ईरान के तेहरान, कुम, इस्फेहान और अराक जैसे शहरों में हिंदुस्तानी स्टूडेंट्स की अच्छी-खासी तादाद है। ईरान और भारत के बीच ट्रेड की वजह से लोगों का आना-जाना होता है।’

‘जून में इजराइल के साथ जंग हुई थी। तब भी भारतीयों के इलाकों में हमले या नुकसान की खबर नहीं आई थी। इस बार भी किसी भी भारतीय के हताहत होने की खबर नहीं है।’

मोहम्मद हुसैन बताते हैं, ‘हमें पता चला है कि इस रीजन में आने वाले अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। ये हमला चौंकाने वाला नहीं है, बल्कि अब ये युद्ध की तरह होगा। हमला करने वाले सभी सहयोगियों को भी सबक सिखाने के लिए ईरान तैयार है। इसीलिए कतर, कुवैत, सऊदी अरब, यूएई में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया है। इससे ईरान का नुकसान होगा, इसमें भी कोई दो राय नहीं है।’

ईरान में फंसे स्टूडेंट बोले- हमें बचा लो

ईरान यूनिट स्टूडेंट्स एसोसिएशन के कोऑर्डिनेटर फैजान अहमद बताते हैं कि तेहरान और ईरान के दूसरे हिस्सों में हालात खराब हो गए हैं। ईरान में ज्यादातर भारतीय स्टूडेंट MBBS की पढ़ाई करते हैं। हमारे पास उनके पेरेंट्स के फोन आ रहे हैं। वे घबराए हुए हैं।

भारत सरकार ने 23 फरवरी को एडवाइजरी जारी कर ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को देश लौटने की सलाह दी थी। स्टूडेंट्स के लिए यह आसान नहीं था। 5 मार्च को दो बड़े एग्जाम ओलंपियाड और प्री-इंटर्नशिप टेस्ट होने हैं। ये दोनों एग्जाम हेल्थ और एजुकेशन मिनिस्ट्री करवाती हैं। एसोसिएशन ने विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लेटर लिखकर संबंधित अधिकारियों से बात करने और छात्रों के लिए कोई समाधान निकालने की अपील की थी।

मौजूदा हालात को देखते हुए एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लेटर लिखा है। उसमें गुजारिश की है कि स्टूडेंट्स की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए और हालात बिगड़ते हैं तो उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। उसका कहना है कि यह उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइट पर हमला किया, तब मिसाइलों ने ही हमें बचाया था।

ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या रीजनल ग्रुप पर नहीं।

इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइलों को तबाह करने और उसके मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने की कोशिश कर रही है। 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया गया।

इजराइल डिफेंस फोर्सेज ने दावा किया है कि उसने अपने इतिहास का सबसे बड़ा एयर ऑपरेशन चलाया। करीब 200 लड़ाकू विमानों ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन विमानों ने एक साथ करीब 500 ठिकानों पर हमला किया।जवाब में ईरान ने भी 9 देशों में अमेरिका के ठिकानों पर हमला किया।

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