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2026 में रूस की यात्रा पर जाएंगे पीएम मोदी

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2030 तक दोनों देशों के बीच होगा 100 अरब डॉलर का व्यापार

नई दिल्ली। दिसंबर, 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की यात्रा पर आए थे, अब भारत के पीएम नरेंद्र मोदी रूस जाने की तैयारी में है।

इस बात की घोषणा रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मॉस्को में आयोजित सम्मेलन श्इंडिया एंड रशिया: टुव‌र्ड्स ए न्यू बाइलेटरल एजेंडा को संबोधित करते हुए दी। रूसी इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल और भारत के मॉस्को स्थित दूतावास ने संयुक्त रूप से आयोजित सम्मेलन को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लावरोव ने वीडियो के माध्यम से संबोधित किया। दोनों विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और रूस ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की मजबूत प्रतिबद्धता जताई है। पिछले साल दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच नए क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया था और द्विपक्षीय कारोबार को सौ अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है।

रूस की यात्रा पर जाएंगे पीएम मोदी

लावरोव ने अपने संबोधन में कहा, श्2026 में हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रूस में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।श् लावरोव ने बताया कि दोनों देशों के बीच कारोबार का 96 प्रतिशत हिस्सा अब राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपये और रूबल) में हो रहा है। यह कदम पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में दोनों देशों की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करता है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत-रूस के विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति में योगदान दे रहा है। उन्होंने व्यापार लक्ष्य (2030 तक 100 अरब डॉलर), सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा (कुडनकुलम प्रोजेक्ट), स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, कुशल पेशेवरों की गतिशीलता, ब्रिक्स, एससीओ और यूएन जैसे मंचों पर सहयोग का उल्लेख किया। उनका भाषण नियंत्रित, संक्षिप्त और मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित रहा।

दूसरी ओर, रूसी विदेश मंत्री लावरोव का संबोधन काफी व्यापक और विस्तृत था। उन्होंने भारत-रूस मित्रता को समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला बताते हुए कहा कि यह बराबरी, पारस्परिक विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के हितों पर विचार पर आधारित है।

लावरोव ने भारत को 21वीं सदी की महान शक्ति और एक अलग सभ्यता करार दिया तथा भारत के साथ विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को रूस की बिना शर्त विदेश नीति प्राथमिकता बताया। उन्होंने पश्चिम एशिया (फारस की खाड़ी क्षेत्र) में अमेरिका और इजरायल द्वारा उकसाई गई तीव्र सैन्य-राजनीतिक संकट का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच संबंध पहले से ज्यादा अब प्रासंगिक हैं।

जयशंकर के संक्षिप्त और संतुलित संबोधन के मुकाबले लावरोव के विस्तृत बयान से रूस की ओर से भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा साफ झलकती है। सनद रहे कि पश्चिम एशिया विवाद के बीच भारत ने एक बार फिर से रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल खरीद रहा है।

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