प्रयागराज (राजेश सिंह)। 'थोड़ा है थोड़े की जरूरत है'। यह कहावत चरितार्थ हुई उप्र लोकसेवा आयोग में समीक्षा अधिकारी पुरुषोत्तम ओझा पर। मूलरूप से चित्रकूट जिले के छीबों गांव निवासी पुरुषोत्तम का चयन नायब तहसीलदार पद पर हुआ।
परिवार यहां गोविंदपुर में रह रहा है। पुरुषोत्तम कहते हैं कि खुशी तो है लेकिन संतुष्टि नहीं, इसलिए यूपीपीसीएस 2025 में भी शामिल होकर और अच्छा परिणाम पाने का प्रयास कर रहे हैं। पिता हरिनंदन ओझा पुलिस विभाग में निरीक्षक हैं जो 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
हालांकि रविवार देर रात परिणाम आया तो पूरा घर खुशियों से उछल पड़ा। मां सुदेश ओझा समेत अन्य परिजनों ने घर के चमकते सितारे पुरुषोत्तम को गले से लगा लिया। मां ने बेटे को मिठाई खिलाकर आशीर्वाद दिया।
प्रत्येक दिन सरकारी सेवा से समय निकालकर पुरुषोत्तम ओझा करीब चार घंटे पढ़ाई भी करते हैं। कहते हैं कि पढ़ना कभी खत्म नहीं होगा, परिणाम भविष्य में और भी अच्छे लाएंगे।
लक्ष्य के प्रति रखी एकाग्रता, बन गईं नायब तहसीलदार
स्व-अध्ययन और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता। यूपीपीसीएस परीक्षा 2024 में नायब तहसीलदार के पद पर चयनित झलवा की रहने वाली अवंतिका शुक्ला खुशी से फूली नहीं समाईं। अवंतिका के पति अभिषेक तिवारी यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं।
मूलरूप से प्रतापगढ़ की रहने वालीं अवंतिका कहती हैं कि मेंस में उनका तीसरा प्रयास और साक्षात्कार पहला था। अवंतिका ने कहीं कोचिंग नहीं की, प्री-परीक्षा के समय करीब 10 घंटे और मेंस के लिए चयनित होने पर करीब 14 घंटे प्रतिदिन भी अध्ययन किया।
हालांकि उन्होंने मॉक इंटरव्यू दिया था जिससे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। अवंतिका कहती हैं कि पिता अजीत कुमार शुक्ला, ससुराल में श्वसुर हनुमान प्रसाद तिवारी से काफी प्रेरणा मिलती रही। नायब तहसीलदार पद मिलने पर कहा कि बहुत खुशी हो रही है, उम्मीद एसडीएम बनने की थी। प्रयास जारी रखेंगी। यूपीपीसीएस 2025 में भी शामिल होकर भविष्य में मनचाहा पद यानी एसडीएम तक पहुंचने का प्रयास करेंगी।
मेधावी छात्रों के बीच रहना काम आया
मुझे तो इस शहर के शैक्षणिक और सामाजिक माहौल ने काफी प्रेरणा दी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान यहीं लड़कों के बीच उठना बैठना काम आया।
भदोही के चौरी थानाक्षेत्र के ग्राम कोम निवासी राहुल यादव के पिता हरिश्चंद्र व्यापारी हैं। मां विद्या देवी गृहणी हैं। राहुल कहते हैं कि पूरी शिद्दत से मेहनत की थी। ग्रेजुएशन के दौरान डायमंड जुबली छात्रावास में रहे। वहां के छात्रों के बीच रहने, कई छात्रों के लगातार यूपीएससी तथा यूपीपीसीएस परीक्षा में चयनित होते रहने का फायदा उन्हें भी मिला।
बताया कि यूपीपीसीएस परिणाम आया तो चयनितों की सूची आंखें फाड़ कर देखने लगे। जल्दी-जल्दी सूची में नीचे की ओर आते गए। अपना रोल नंबर जैसे ही दिखा और पदनाम असिस्टेंट कमिश्नर कामर्शियल टैक्स रहा तो काफी खुशी हुई।
