लखनऊ। बसपा के दिवंगत संस्थापक कांशीराम को ‘भारत रत्न’ से अलंकृत करने की राजनीतिक दलों की मांग रविवार को उनकी जयंती पर घनीभूत हुई। कांग्रेस की ओर से बीते शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में कांशीराम को भारत रत्न दिए जाने की मांग करने वाले पार्टी के नेता राहुल गांधी ने रविवार को इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बसपा संस्थापक को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने की मांग की।
वहीं जयंती के अवसर पर बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर को लंबे समय तक भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया, वैसी गलती भाजपा/एनडीए की केंद्र सरकार को नहीं करनी चाहिए। संविधान की भावना के अनुरूप समतामूलक समाज बनाने में उनका योगदान अतुलनीय है।
मायावती के नेतृत्व में बसपा ने रविवार को अपने संस्थापक कांशीराम की जयंती को देश-प्रदेश में मनाकर शक्ति प्रदर्शन किया। लखनऊ में पार्टी के केंद्रीय कैंप कार्यालय में मायावती ने वरिष्ठ नेताओं के साथ कांशीराम की प्रतिमा व चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक तरफ बहुजन समाज का आह्वान किया कि वह बसपा से जुड़कर सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करे तो दूसरी ओर सपा, भाजपा व कांग्रेस पर हमला बोला।
कहा कि कांशीराम ने भीमराव आंबेडकर के विचारों और आंदोलन को पूरे देश में आगे बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया और बहुजन समाज को राजनीतिक शक्ति के रूप में संगठित किया। बसपा ‘बातें कम और काम अधिक’ की नीति में ज्यादा विश्वास करती है जबकि दूसरी पार्टियां केवल हवा-हवाई बातों, लुभावनी घोषणाओं व दावों के साथ ‘अच्छे दिन’ के हसीन सपनों के माध्यम से जनता को उलझाए रखना चाहती हैं।
‘अच्छे दिन’ के चक्रव्यूह में फंसकर जनता त्रस्त है। बसपा ही बहुजन समाज के हित, कल्याण और उत्थान की असली पार्टी और मूवमेंट है, जबकि अन्य दलों की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सहित अन्य विरोधी दल बहुजन समाज की एकता और सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करने के मिशन को कमजोर करते रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज के नाम पर राजनीति करने वाली पार्टियां चुनाव के समय ही इन वर्गों और उनके महापुरुषों को याद करती हैं, जबकि सरकार बनने के बाद उन्हें उपेक्षित कर दिया जाता है। सपा का पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) प्रेम भी सिर्फ चुनावी छलावा है। मायावती ने अंत में बहुजन समाज से एकजुट होकर अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल करने और बसपा के सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया। कहा कि यही कांशीराम के जीवन का संदेश और मिशन रहा है।
जयंती के अवसर पर लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल और नोएडा के राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित कर कांशीराम को श्रद्धांजलि दी। वहीं, राजस्थान के भरतपुर में आयोजित कार्यक्रम में बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
गौरतलब है कि कांशीराम की जयंती को लेकर शुक्रवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में कांग्रेस की ओर से आयोजित सामाजिक परिवर्तन दिवस समारोह में राहुल गांधी ने कहा था कि सामाजिक परिवर्तन को लेकर अगर कांग्रेस ने अपना काम पूरी तरह से किया होता तो बसपा के संस्थापक कांशीराम कभी भी राजनीति में सफल नहीं होते।
उन्होंने यह भी कहा था कि अगर जवाहर लाल नेहरू जिंदा रहते तो कांशीराम कांग्रेस में होते और पार्टी उन्हे मुख्यमंत्री बनाती।
