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वंदेमातरम से ही सभी स्कूलों में होगी हर दिन की शुरूआत

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नई दिल्ली। एक तरफ जहां बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भरोसा पत्र जारी करे हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वंदेमातरम संग्रहालय बनाने का एलान किया वहीं शिक्षा मंत्रालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि स्कूलों में हर दिन वंदेमातरम गान के साथ ही काम की शुरूआत हो।

वह भी उस वंदेमातरम गान के साथ जिसमें मूल गान के सभी छह छंद हैं और हाल ही में गृहमंत्रालय ने सभी विभागों को दिशा निर्देश जारी कर सभी छंदों के गाने की बात कही थी। स्कूलों के पदाधिकारियों से छात्रों में राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान को लोकप्रिय बनाने और राष्ट्रीय झंडे के प्रति श्रद्धा बढ़ाने के लिए समुचित व्यवस्था भी करने को कहा है।

कुछ महीने पहले वंदेमातरम रचना के डेढ़ सौ साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा नेताओं की ओर से इस बात की आलोचना की गई थी कि मूल गीत से उन छंदों को हटा लिया गया था जिसमें मां दुर्गा का गान किया गया था। उसके बाद ही सरकार ने मूल गीत को प्रचारित करने का निर्णय लिया था।

गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को वंदेमातरम गीत पालन को लेकर यह आदेश देश के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को दिए है। यह भी बताया गया था कि पूरा गीत 3.10 मिनट में गाया जाना है जैसे राष्टगाण के लिए 52 सेकेंट का समय नियत है। शुक्रवार को शिक्षा मंत्रालय ने उसी आदेश की प्रति के साथ शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी देश के सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के लिए इसके पालन का निर्देश दिया है।

जहां राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान दोनों गाए जाने हो, वहां पहले हो राष्ट्रगीत

गृह मंत्रालय ने वंदेमातरम को लेकर जारी प्रोटोकाल में यह साफ किया है कि जब राष्ट्र गीत व राष्ट्र गान दोनों गाए जाने हो, तो वहां पहले राष्ट्र गीत गाया या बजाया जाएगा। इसके साथ ही यह भी साफ किया है कि जब कभी राष्ट्र गीत का गायन या वादन हो, तब श्रोतागण सावधान होकर खड़ रहे। लेकिन समाचार दर्शन या फिर डाक्यूमेंटरी के दौरान राष्ट्र गीत फिल्म के अंश के रूप में बजाया जाता है, तो खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाती क्योंकि खड़े होने से राष्ट्रगीत के गौरव में वृद्धि होने की जगह फिल्म के प्रदर्शन में बाधा पड़ती है और अशांति व गड़बड उत्पन्न होती है। गौरतलब है कि राष्ट्र गीत वंदेमातरम की रचना बंकिम चन्द्र चटर्जी ने की थी।


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