पणजी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि महिलाओं के आरक्षण अधिनियम में आगामी विशेष सत्रों में सभी राजनीतिक दलों के सहयोग से सर्वसम्मति से संशोधन किया जाएगा।
बिरला ने यह भी कहा कि सदन के भीतर और संसद परिसर में असंसदीय शब्दों का उपयोग और बैनर व प्लेकार्ड दिखाने की अनुमति नहीं है और उपयोग की जाने वाली भाषा संसद की परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधनों के बारे में शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यह कानून सितंबर 2023 में नए संसद में पारित होने वाला पहला कानून था, जब सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया था और इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
उन्होंने कहा, ''इसलिए मुझे उम्मीद है कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन संसद में सभी के सहयोग से सर्वसम्मति से किए जाएंगे।'' ध्यान रहे कि संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है और 16 से 18 अप्रैल के बीच सदन का एक विशेष तीन दिवसीय सत्र बुलाया गया है।
महिलाओं के आरक्षण अधिनियम के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या 816 तक बढ़ाई जाएगी, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का प्रविधान 2023 में संविधान में संशोधन करके लाया गया था, लेकिन यह 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद लागू होगा।
यदि वर्तमान कानून वैसा ही बना रहता है, तो यह 2034 में लागू होने की उम्मीद है, इसलिए इसे 2029 के आम चुनावों से लागू करने के लिए संशोधित करने की आवश्यकता है।
संसद में कुछ अवसरों पर असंसदीय भाषा के उपयोग पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उपयोग की जाने वाली भाषा हमेशा संसद की परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए। इसके अलावा, बैनर और पोस्टर अंदर नहीं लाए जाने चाहिए।
हमने इसके लिए एक बुलेटिन जारी किया है और संसद के सभी सदस्यों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों से व्यक्तिगत रूप से अपील की है। व्यापार सलाहकार समिति की बैठकों में भी चर्चा की गई थी कि बैनर, प्लेकार्ड, असंसदीय भाषा और नारेबाजी का उपयोग लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
