अजादारों की आंखें नम हुईं, दुलदुल और परचम-ए-अब्बास की जियारत
प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज में 24 जून को आठवीं मुहर्रम मनाई गई। चक जीरो रोड स्थित इमामबाड़ा डिप्टी जाहिद हुसैन में मजलिस का आयोजन हुआ, जहां फौजे हुसैनी के अलम बरदार हजरत गाजी अब्बास की शहादत का बयान किया गया। मौलाना सैयद जमीर हैदर रिजवी ने कर्बला की घटना का जिक्र किया, जिसे सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं।
मौलाना रिजवी ने बताया कि तीसरी मुहर्रम से यजीदी लश्कर ने नहरे फुरात पर पहरा लगा दिया था, जिससे खैमा-ए-हुसैनी में पानी का संकट गहरा गया। प्यासे बच्चों की पुकार सुनकर हजरत गाजी अब्बास पानी लेने नहरे फुरात पहुंचे। वहां यजीदी सेना ने उन पर तीरों और भालों से हमला कर दिया। पानी से भरा मश्कीजा भी तीरों से छलनी कर दिया गया और हजरत अब्बास शहीद हो गए। इस बयान को सुनकर अजादार भावुक हो गए।
मजलिस की शुरुआत मंजरुल हिंदी की सोजख्वानी से हुई। इसके उपरांत गुलाब के फूलों से सजे दुलदुल और परचम-ए-अब्बास को श्रद्धापूर्वक निकाला गया। सफेद चादर पर लाल रंग के प्रतीकात्मक निशान लगाए गए थे, जिनकी जियारत के लिए बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। 'या अली, या हुसैन' के नारों के साथ मातमी अंजुमनों ने सीनाजनी की। अंजुमन हैदरिया के नौहाख्वान हसन रिजवी ने नौहाख्वानी प्रस्तुत की।
इसी कड़ी में दरियाबाद से 20 वर्ष पुराना पारंपरिक जुलूस भी निकाला गया। इस जुलूस में मौलाना आमिरुर रिजवी ने शहादत का जिक्र किया। अंजुमन नकविया के नौहाख्वान शाहरुख शबी हसन ने रौनक साफीपुरी का कलाम पेश किया।
सैय्यद मोहम्मद अस्करी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नौवीं मुहर्रम पर दिन में मजलिस होगी और रात में मीरगंज इमामबाड़े से पारंपरिक जुलूस निकाला जाएगा। इस जुलूस में जुल्जनाह और अलम की जियारत कराई जाएगी।
