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हाई कोर्ट ने वकील के ‘फर्जी’ होने के मामले में हस्ताक्षर की एफएसएल जांच के दिए आदेश, एक माह में मांगी रिपोर्ट

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका में शामिल एक वकील की पहचान और दस्तावेजों पर लगे हस्ताक्षरों की सच्चाई जांचने के लिए फारेंसिक जांच का आदेश दिया गया है। मामला फतेह मेमोरियल इंटर कालेज, तमकुही, कुशीनगर के प्रबंधन समिति के चुनाव को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका का है। यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र और मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली की खंडपीठ ने दिया है।याचिकाकर्ता संगीता गुप्ता ने वर्ष 2023 में हुए प्रबंधन समिति के चुनाव को चुनौती दी।

बाद में उन्होंने याचिका वापस लेने के लिए एक आवेदन दाखिल किया। इसी आवेदन को लेकर विवाद शुरू हुआ जब संस्थान की ओर से यह आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने विपक्षी पक्ष के वकील परिजात श्रीवास्तव के हस्ताक्षर नकली करके दिखाया कि उन्हें वापसी आवेदन की कापी मिल गई है।प्रतिवादी पक्ष (कालेज प्रबंधन) ने अदालत में एक आवेदन दायर कर आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता संगीता गुप्ता, उनके वकील अमित प्रताप सिंह और एक अन्य वकील अशरफ अली आपसी साठगांठ से लगातार झूठे और दिखावटी मुकदमे दाखिल कर रहे हैं।

आरोप है कि अशरफ अली नाम का वकील वास्तव में अमित प्रताप सिंह द्वारा गढ़ी गई एक काल्पनिक पहचान है। दोनों के पते और मोबाइल नंबर एक ही बताए गए हैं। अदालत के कई आदेशों में इस बात का जिक्र है कि पिछली सुनवाइयों में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए अशरफ अली के नाम से कोई व्यक्ति हाजिर हुआ, लेकिन बाद में एक अलग व्यक्ति ने स्वयं को अशरफ अली बताते हुए अदालत में पेश होने का दावा किया।

इस उलझन के बाद कोर्ट ने 20 अगस्त के आदेश में उस व्यक्ति से जो स्वयं को अशरफ अली बता रहा था, बेंच सचिव के सामने हस्ताक्षर करने को कहा था। खंडपीठ ने देखा कि याचिका पर ए अली के रूप में, वापसी आवेदन पर, कोर्ट के आर्डर शीट पर और कूरियर रसीद पर लगे अशरफ अली के हस्ताक्षर एक-दूसरे से स्पष्ट रूप से भिन्न हैं। इन गंभीर आरोपों और अदालती प्रक्रिया के दुरुपयोग को देखते हुए पीठ ने हस्ताक्षरों की वैधता की वैज्ञानिक जांच के आदेश दिए। 

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि मामले की सभी संबंधित मूल दस्तावेज (मूल याचिका, वापसी आवेदन, आर्डर शीट वाला पन्ना और विपक्षी वकील का वकालतनामा) लखनऊ स्थित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजे जाएं। एफएसएल को एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को देने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 6 जनवरी, 2026 को होगी।

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