Ads Area

Aaradhya beauty parlour Publish Your Ad Here Shambhavi Mobile Aaradhya beauty parlour

चतुर्ग्रहीय योग में लग रही ‘मौन’ डुबकी, बरसेगी देव कृपा

sv news

प्रयागराज (राजेश सिंह)। जनकल्याण, राष्ट्र उत्थान, पर्यावरण संरक्षण के निमित्त संगम की रेती पर यज्ञ-अनुष्ठान चल रहा है। प्रतिदिन देश-विदेश के श्रद्धालु संगम के पवित्र जल में डुबकी लगा रहे हैं। आध्यात्मिक अलख के बीच माघ मास का प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है। मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु तीर्थराज प्रयाग आकर संगम में स्नान करेंगे। मौनी अमावस्या पर ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बन रहा है, जो अत्यंत पुण्यकारी माना जा रहा है।

sv news

ज्योतिर्विद पंडित कमला शंकर उपाध्याय के अनुसार 17 जनवरी की रात 11.53 बजे अमावस्या तिथि लग जाएगी। जो 18 जनवरी की रात 1.09 बजे तक रहेगी। इसकी वजह से रविवार को दिनभर स्नान-दान का विशेष योग है। पूर्वाषाढ़ व उत्तराषाढ़ नक्षत्र रहेगा। वहीं, मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य का संचरण होने से चतुर्ग्रहीय योग बन रहा है। मकर अर्थात मगरमच्छ मां गंगा का वाहन है। ऐसे में मौनी अमावस्या पर संगम अथवा गंगा में डुबकी लगाने वालों को देवकृपा की प्राप्ति होगी। ऐसे लोगों को चतुर्विद उन्नति प्राप्त होगी। 

द्वारका शारदा पीठ के प्रतिनिधि व श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के अनुसार पद्म पुराण में माघ मास की अमावस्या तिथि को श्रेष्ठ बताया गया है। इसमें मौन व्रत रखकर पवित्र नदी में स्नान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। स्नान के समय अपने-अपने आराध्य का ध्यान करना चाहिए। भूलकर भी छल-कपट, धोखा धड़ी जैसे अनैतिक कार्य नहीं करना चाहिए।

गाय, कुत्ता व कौआ के अपमान से बचें 

उन्होंने बताया कि गाय, कुत्ता व कौआ का संबंध पितरों से माना गया है। अमावस्या पर इनके अपमान से बचना चाहिए। तन, मन और वाणी को पवित्र रखना चाहिए। मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। सुबह स्नान के बाद पीपल की परिक्त्रमा करना चाहिए, जबकि शाम को पीपल पर दीपदान करना चाहिए। 

मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद पीपल के वृक्ष का पूजन, तिल के लड्डू, तिल, तिल का तेल, वस्त्र, आंवला आदि दान करना पुण्यकारी होता है। मौन व्रत रखने के साथ इंद्रियों को वश में रखना चाहिए। ऐसा करने वाले को आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। बताते हैं कि जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा नीच का होता है, उन्हें मौनी अमावस्या पर दूध, चावल, खीर, मिश्री और बताशा दान करना चाहिए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Top Post Ad