प्रयागराज (राजेश सिंह)। संगम की रेती में साधु-संतों अनूठी दुनिया है। कोई रुद्राक्षों से सजा है, किसी को लग्जरी गाड़ियां पसंद है। अद्भुत पंडाल किसी की पहचान हैं। गद्दी न मंच। इन सबसे भिन्न है सेक्टर-6 स्थित जयगोविंद बढ़त धर्म ट्रस्ट का शिविर। अधिकतर संतों में जहां शंकराचार्य, जगदगुरु, श्रीमहंत, महंत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीश्री 1008 की पदवी पर सुशोभित होने की होड़ है। इसके इतर ट्रस्ट के संचालक हैं फटीचर बाबा। कोई दिखावा न आडंबर। सादगी वाला जीवन और जमापूंजी राम का नाम है। फटीचर बाबा का नाम सुनकर लोग मुस्कुराने लगते हैं३ और थोड़ा चौंकाते भी हैं।
शिविर के बाहर राहगीर ठिठक जाते हैं
शिविर के बाहर “फटीचर बाबा का राम-राम” पढ़कर राहगीर ठिठक जाते हैं। सोचते हैं कि कौन हैं ये फटीचर बाबा? शिविर पूरी तरह राम नाम को समर्पित है। जमीन पर साधारण ढंग से बैठे बाबा आम श्रद्धालु की तरह दिखते हैं। फटीचर बाबा के शिविर में प्रवेश करने पर चारों ओर राम-राम की ध्वनि सुनाई देती है। हर कार्य से पहले राम नाम का जाप होता है। संतों के वस्त्रों पर भी राम-राम लिखा है। इनका जीवन भी उतना ही सादा है, जितना इनका नाम।
परमात्मा की प्रेरणा से ही फटीचर नाम रखा
फटीचर बाबा अनोखे नाम के बारे में बताते हैं, यह परमात्मा की देन है। मृत्यु लोक में सभी नश्वर है। जन्म से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति भटकता रहता है। अंत में खाली हाथ जाता है। परमात्मा की प्रेरणा से ही फटीचर नाम रखा है। हमारा सब कुछ राम है। राम नाम में ही हमारा संसार बसता है। यहां न भिक्षा मांगी जाती है, न धन का संग्रह होता है।
जरूरतमंदों को बांट दिया जाता है दान में मिला सामान
कंबल, बस्त्र, धन जो दान में मिलता है उसे जरूरतमंदों को बांट दिया जाता है। फटीचर बाबा के शिष्यों के नाम के आगे राम जुड़ जाता है। जैसे फटीचर बाबा राम। इनकी पहचान जिस क्षेत्र के होते हैं उससे होती है। हर व्यक्ति को राम नाम के साथ न जी लगता है, न श्री।
भोजन में मोटी रोटी, दाल और मिर्च
फटीचर बाबा के पास जो आता है, वही परिवार का हिस्सा बन जाता है। जुड़ने वाले हर व्यक्ति को नशा न करने, झूठ न बोलने, किसी का अहित न करने का संकल्प लेना पड़ता है। शिविर में मोटी रोटी, दाल और मिर्च खाने के लिए मिलती है। कई बार बाबा खुद भोजन बनाकर लोगों को खिलाते हैं। जमीन पर बैठकर सभी एक साथ भोजन करते हैं।
गृहस्थ बनते हैं संत
जयगोविंद बढ़त धर्म टस्ट्र का मुख्यालय मलाड ईस्ट मुंबई में है। भक्त देशभर में हैं। इससे गृहस्थों को अधिक जोड़ा जाता है। वैसे तो संस्था से हजारों लोग जुड़े हैं, लेकिन 80 प्रतिशत से अधिक गृहस्थ हैं।शिविर का प्रबंधन देखने वाले हमीरपुर के राम किशुन द्विवेदी अध्यापक हैं। इन्हें अध्यात्मिक नाम संत राम प्रकाश राम मिला है। बताते हैं कि गृहस्थों को जोड़ने के पीछे फटीचर बाबा की मंशा पवित्र है। गृहस्थ राम का नाम लेकर सदमार्ग पर चलेंगे तो सामाजिक समरता स्वतरू आएगी। व्यक्ति का भाव पवित्र होगा। इससे घर और बाहर भेदभाव नहीं होगा।
नहीं करते मूर्ति पूजा
फटीचर बाबा और उनके शिष्य मूर्ति पूजा नहीं करते। सिर्फ राम नाम का उच्चारण करते हैं। संकीर्तन की तरह राम का नाम लिया जाता है, जिसे राम अवध का नाम दिया गया है। राम अवध का मतलब जहां राम का निवास हो और किसी की अकाल मृत्यु न हो।
