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अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-प्रशासन पर केस करूंगा

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उनको दिया गया नोटिस वापस नहीं लिया तो वह मानहानि का केस करेंगे।

प्रशासन के नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंगलवार रात करीब 10 बजे अपने प्रतिनिधि के हाथों 8 पन्नों का जवाब मेला प्रशासन के कार्यालय भिजवाया। कोई नहीं मिला तो प्रशासन स्टाइल में नोटिस का जवाब चस्पा कर दिया। हालांकि बाद में उसे हटवा दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना जवाब ई-मेल के जरिए भी भेजा है। इसमें नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जिससे मुझे शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका गया हो। मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी तीसरे पक्ष को टिप्पणी करने या रोक लगाने का अधिकार नहीं है। रअसल, मंगलवार को मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के एक आदेश का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर पूछा था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य कैसे घोषित कर लिया।

द्वारका पीठ के शंकराचार्य बोले- यह गो हत्या जैसा पाप

द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद को मौनी अमावस्या पर स्नान करने से रोके जाने की निंदा की। उन्होंने कहाद-प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए। ब्राह्मणों को पुलिस ने चोटी पकड़कर घसीटा। यह शासन का अहंकार है। सत्ता हर दिन नहीं रहेगी। गंगा स्नान से रोकने वालों को गो हत्या का पाप लगता है। बता दें कि सदानंद महाराज और अविमुक्तेश्वरानंद, स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं। उनके निधन के बाद दोनों एक साथ शंकराचार्य बने थे।

रामभद्राचार्य बोले- अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्याय किया

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ। अन्याय तो उन्होंने किया है। स्नान के लिए गंगा तक पालकी से जाने का नियम नहीं है। हम लोग भी पैदल ही जाते हैं। सरकार ने उन्हें खुद को शंकराचार्य साबित करने के लिए बिल्कुल सही नोटिस जारी किया है।

रविवार (मौनी अमावस्या के दिन) को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। शिष्यों से मारपीट और पालकी रोके जाने से नाराज अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।

सोमवार रात 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार माघ मेला में शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। उन्होंने शंकराचार्य के शिष्यों से नोटिस लेने के लिए कहा। शिष्यों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। कहा- इतनी रात में कोई नहीं हैं। सुबह आइएगा। कानूनगो अनिल कुमार मंगलवार सुबह फिर शंकराचार्य शिविर पहुंचे। वहां गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य की पदवी को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद के बीच विवाद है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

सपा नेता माता प्रसाद बोले- विधानसभा में मुद्दा उठाऊंगा

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और सपा नेता माता प्रसाद पांडेय बुधवार को माघ मेला पहुंचे। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर उन्हें शंकराचार्य का मुद्दा सदन में उठाने का आश्वासन दिया। अविमुक्तेश्वरानंद अभी सेक्टर-4 में अपने शिविर के बाहर बैठे हैं।

रामभद्राचार्य बोले- अविमुक्तेश्वरानंद के साथ सही हुआ

जगद्गुरू रामभद्राचार्य ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ। अन्याय तो उन्होंने किया है। नियम यह है कि गंगा तक पालकी से नहीं जाया जाता। हम लोग भी पैदल ही जाते हैं। सरकार ने उन्हें खुद को शंकराचार्य साबित करने के लिए बिल्कुल सही नोटिस जारी किया है।

चंद्रशेखर ने पूछा- चोटी उखाड़ना तानाशाही नहीं तो क्या ?

सांसद चंद्रशेखर ने कहा, श्शंकराचार्य के समर्थकों की चोटी उखाड़ी गई। अगर यह सरकार की तानाशाही नीति नहीं है, तो फिर क्या है? मैंने उनकी (अविमुक्तेश्वरानंद ​​​​​) आंखों में आंसू देखे हैं। उनकी पीड़ा को महसूस किया है। जब ये (भाजपा) उनके नहीं हुए, तो आपके कैसे होंगे।

धार्मिक छत्र का नेतृत्व सरकार पास रखना चाहती है- शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती

गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा- धार्मिक छत्र का नेतृत्व सरकार पास रखना चाहती है। हम कोई वकील नहीं हैं कि सरकार को सुझाव दें, लेकिन मैं संविधान का भी जानकार हूं। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग मुझसे वकालत और निर्णय लेने के तरीके के बारे में पूछते रहते हैं। जब मैं शंकराचार्य नहीं था, तब भी 32-32 लोगों ने मुझसे प्रशिक्षण लिया था।

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