13 ध्वजों के साथ निकली यात्रा, 6 दिन बाद अक्षयवट पर होगी विशेष पूजा
प्रयागराज (राजेश सिंह)। माघ मेले के पावन अवसर पर ओडी फोर्ट (व्तकदंदबम क्मचवज थ्वतज) में सेना के जवानों और अधिकारियों ने वर्षों पुरानी परंपरा का भव्य निर्वहन किया। इस दौरान सेना की ओर से ‘निशान यात्रा’ निकाली गई और गंगा तट पर माँ गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। पूरे आयोजन का नेतृत्व कमानडेंट माहिम शर्मा ने किया, जिन्होंने इस ऐतिहासिक परंपरा के महत्व और इसकी सैन्य परंपराओं से जुड़ी विशेषताओं को साझा किया।
कमानडेंट माहिम शर्मा ने बताया कि ओडी फोर्ट से गंगा तट तक निकाली जाने वाली यह यात्रा सेना की वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। माघ माह में सेना के जवान पूर्ण आस्था के साथ पैदल यात्रा करते हुए गंगा तट तक पहुंचते हैं और संगम क्षेत्र में लेटे हुए हनुमान जी के समीप विशेष पूजा करते हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ यह परंपरा और अधिक जीवंत और भावनात्मक रूप ले लेती है।
इस धार्मिक और सैन्य आयोजन की सबसे खास बात 13 निशानों (ध्वजों) की सहभागिता रही। कमानडेंट के अनुसार, सेना के विभिन्न सब-डिपो से 9 निशान और प्रशासनिक शाखाओं से 3 निशान शामिल किए जाते हैं। इन सभी निशानों के साथ गंगा जल से पूजन कर उन्हें शुद्ध किया जाता है, जो सैन्य अनुशासन और परंपरा का प्रतीक है।
गंगा पूजन के बाद यह परंपरा अगले चरण में प्रवेश करती है। आगामी छह दिनों के भीतर अक्षयवट पर विशेष पूजा आयोजित की जाएगी। यहां पुराने निशानों को बदलकर नए निशान स्थापित किए जाएंगे और अक्षयवट महाराज की विधिवत अर्चना की जाएगी।
कमानडेंट माहिम शर्मा ने ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ के मंत्र के साथ देश की सुरक्षा, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि सेना को मिली देश रक्षा की जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और साहस के साथ निभाने के लिए ईश्वर का आशीर्वाद जरूरी है।
प्रयागराज किला और उसके भीतर स्थित ओडी फोर्ट सेना के नियंत्रण में है। यहीं स्थित अक्षयवट हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। माघ मेले के दौरान सेना द्वारा निशान पूजन की यह परंपरा अनुशासन, आस्था और राष्ट्रभक्ति के अद्भुत संगम को दर्शाती है।
