प्रयागराज (राजेश सिंह)। मंगलवार को त्रिवेणी मार्ग, सेक्टर-4 स्थित शंकराचार्य शिविर में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी का नगर में ससम्मान आगमन हुआ, जहाँ श्रद्धालु व संत समाज द्वारा उनका भव्य स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। शंकराचार्य शिविर में आगमन उपरांत समवेत संत-समाज एवं उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए शंकराचार्य जी ने माघ मेले की आध्यात्मिक परंपरा, ऐतिहासिक महत्ता और सांस्कृतिक धरोहर पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि-“माघ मेला केवल एक पर्व नहीं है, यह सनातन साधना, तीर्थ-परंपरा, संत-समागम और आध्यात्मिक जागरण का महान उत्सव है। यहाँ आने वाला प्रत्येक साधक तीर्थराज प्रयाग के दिव्य संगम से जीवन में पुण्य और प्रेरणा प्राप्त करता है।”
शंकराचार्य जी ने आगे कहा कि वे माघ मेला अवधि में उपस्थित सभी प्रमुख संतों से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे और समस्त आश्रमों व शिविरों में जाकर संवाद करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ-संरक्षण एवं गौ-सेवा राष्ट्र और धर्म के लिए अत्यंत अनिवार्य विषय हैं और समाज, सरकार तथा धर्माचार्यों के संयुक्त प्रयास से ही इस दिशा में प्रभावी कार्य संभव है।
“मैं माघ मेला में संत-समाज से मिलकर गौ माता के संरक्षण व संवर्धन हेतु समर्थन माँगूँगा तथा इस विषय को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास करूंगा।” कृ शंकराचार्य जी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने बताया कि इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित संत, विद्वान एवं संगठन प्रतिनिधि उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख रूप से स्वामी अमृशाननाद, सहजानंद ब्रह्मचारी, तीर्थानंद ब्रह्मचारी, देवेंद्र पांडे ‘गोप जी’, पंकज पांडेय, राम सजीवन शुक्ला,संजय मिश्रा, राजा सक्षम सिंह योगी, संत भारत दास समेत तमाम लोग उपस्थति रहे। कार्यक्रम की समन्वय व्यवस्था संतों की गरिमा एवं अनुशासन के अनुरूप सम्पन्न हुई। श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस संबंध में राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि माघ मेले में शंकराचार्य शिविर में प्रतिदिन विचार-संवाद, संत-समागम एवं गौ-संरक्षण संबंधित विमर्श आयोजित किए जाएंगे, जिसमें देशभर के संत, विद्वान, गौ-सेवक एवं भक्तजन सहभागिता करेंगे। अंत में कार्यक्रम संत-आशीर्वचन एवं राष्ट्र-कल्याण की मंगलकामना के साथ सम्पन्न हुआ।
