लोक से शास्त्रीय कला तक दिखी भारतीय विविधता; 20 चित्रकारों ने उतारी संस्कृति की भव्यता
प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज के माघ मेले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित कला एवं संस्कृति संगठन संस्कार भारती द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना जगाना और लोक कला-संस्कृति को बढ़ावा देना है। ये कार्यक्रम 19 जनवरी से 29 जनवरी तक संस्कार भारती के शिविर में चल रहे हैं, जिनमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए युवा कलाकार सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
संस्कार भारती काशी प्रांत के संगठन मंत्री दीपक जी ने बताया कि यह एक प्रदर्शन-आधारित संगठन है, जो कलाकारों को मंच के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है। माघ मेले के दौरान आयोजित इन कार्यक्रमों में लोक, शास्त्रीय, भक्ति संगीत, नृत्य, नाट्य, गायन और सामूहिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है।
शिविर में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, श्स्वमेव मृगेन्द्रताश् और संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आकर्षक रेत कलाकृतियां तैयार की गई हैं, जो दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, एक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें श्वंदे मातरमश् के 150 वर्ष पूरे होने पर कलाकारों ने भारत माता के विविध रूपों को अपने चित्रों के माध्यम से जीवंत किया है। इन कलाकृतियों में देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
संस्कार भारती के महामंत्री और शिविर संयोजक विभव शंकर मिश्रा ने जानकारी दी कि राज्य ललित कला अकादमी और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय कला कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए 20 चित्रकारों ने भाग लिया। कार्यशाला में तैयार की गई कलाकृतियों की एक भव्य प्रदर्शनी पद्मश्री बाबा योगेंद्र जी कला परिसर में लगाई गई है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में कला-प्रेमी पहुँच रहे हैं और कलाकारों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना कर रहे हैं।
संस्कार भारती की इन सांस्कृतिक संध्याओं ने माघ मेला क्षेत्र को भारतीय सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत केंद्र बना दिया है।
