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शिल्प मेले में भक्ति-लोकसंगीत की शाम यादगार बनी

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कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा

प्रयागराज (राजेश सिंह)। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा आयोजित शिल्प मेले के तहत एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। यह संध्या भक्ति, लोकसंगीत और पारंपरिक कलाओं से परिपूर्ण रही, जिसमें कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर शाम तक बांधे रखा।

कार्यक्रम की शुरुआत भजन गायक सूर्य प्रकाश दुबे की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने “को कहीं सखनी प्रयाग प्रभाऊ कलुष पुंज पंजर मृग राहु”, “प्रयाग नगरी बसे संगम के तीरे”, “पावन तीरथ प्रयागराज में पुण्य कमाते हैं”, “जहां त्रिवेणी संगम है घूम के आते हैं” और “मीरा आपकी कृपा से” जैसे भजनों का गायन किया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ा।

इसके बाद लोकगायिका नीलम शर्मा ने मंच संभाला। उन्होंने अपनी मधुर आवाज में “मोरी नैया में लक्ष्मण राम”, “गंगा मैया धीरे बही”, “अवध नगरिया से चलली बरियतिया हे सुहावन लागे” और “त्रिभुवन विदित अवध जैकर नउआ” जैसे लोकप्रिय लोकगीत प्रस्तुत किए। उनके गीतों ने श्रोताओं को लोकसंगीत की मिठास से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम के अगले चरण में जवाबी बिरहा की प्रस्तुति हुई। इसमें विनोद कुमार पटेल, छेदी लाल, कुंवर बहादुर यादव और लवकुश कनौजिया ने अपने प्रभावशाली अंदाज़ में बिरहा गायन कर दर्शकों का मनोरंजन किया। कलाकारों की तुकबंदी और लोकशैली की गायकी ने श्रोताओं को प्रभावित किया।

कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने सभी कलाकारों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोकसंस्कृति और पारंपरिक कलाओं को नई पहचान देते हैं। इस सांस्कृतिक संध्या का संचालन आकांक्षा पाल ने किया, जिसने शिल्प मेले को एक नई ऊंचाई दी और दर्शकों के लिए यादगार बन गई।

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