इलाहाबाद हाईकोर्ट में कट-ऑफ पर्सेंटाइल पर उठे थे सवाल
प्रयागराज (राजेश सिंह)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज के नीट पीजी 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल को कुछ कैटेगरी के लिए शून्य पर्सेंटाइल और माइनस 40 स्कोर तक कम करने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका आज खारिज कर दी। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही इसी तरह की याचिका खारिज कर चुका है। इस विषय पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी पेंडिंग है।
याचिकाकर्ता एडवोकेट अभिनव गौर ने इस कदम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) के खिलाफ बताया था। याचिका में इस आधार पर फैसले को चुनौती दी गई थी कि नीट पीजी 2025 के लिए कट-ऑफ अंकों में भारी कमी मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया की पवित्रता को कमजोर करेगी। याचिका में बताया गया कि जब 19 अगस्त, 2025 को नीट पीजी 2025 के नतीजे घोषित किए गए तो क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल मूल नीट पीजी 2025 सूचना बुलेटिन के अनुसार थे। 1. जनरल/ ईडब्ल्यूएस के लिए 50वां पर्सेंटाइल, 2. जनरल- पीडब्ल्यूडी के लिए 45 वां पर्सेंटाइल। 3. एससी-एसटी ओबीसी (इन कैटेगरी में पीडब्ल्यूडी सहित) के लिए 40 वां पर्सेंटाइल।
हालांकि, याचिका में कहा गया कि काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद 18,000 से ज़्यादा सीटें खाली रहने के बाद बोर्ड ने क्वालिफाइंग मानदंडों में भारी कमी की। अब, एससी-एसटी ओबीसी कैटेगरी के उम्मीदवार श्0श् के क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 800 में से माइनस 40श् का कट-ऑफ स्कोर, के साथ काउंसलिंग के लिए योग्य हैं।
जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को घटाकर 7 वें पर्सेंटाइल कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप संशोधित कट-ऑफ स्कोर 103 हो गया। बेंचमार्क दिव्यांगता (पीडब्ल्यूडी) वाले अनारक्षित उम्मीदवारों के लिए, क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को घटाकर 5 कर दिया गया (संबंधित कट-ऑफ स्कोर 90)। याचिका में यह भी बताया गया कि जनरल (ईडब्ल्यूएस ) कैटेगरी में कट-ऑफ 276 से घटाकर 103 कर दिया गया, जबकि जनरल-पीडब्बल्यूडी कैटेगरी में इसे 255 से घटाकर 90 कर दिया गया।
याची ने कहा, हालांकि, एससी-एसटी ओबीसी कैटेगरी में इसे 235 से घटाकर -40 मार्क्स कर दिया गया, जिस पर याचिका में तर्क दिया गया कि इससे पब्लिक हेल्थ और मरीज़ों की सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा, जो कि जनता की सबसे बड़ी चिंता के मामले हैं। इनमें उच्च स्तर की एकेडमिक सटीकता की ज़रूरत होती है। आगे यह भी कहा गया कि ऐसे डॉक्टरों की क्वालिटी, जिनके पास परीक्षा पास करने के लिए न्यूनतम योग्यता भी नहीं है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार को प्रभावित करेगी।
