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लाखों की भीड़ में छह माह से लापता बेटे को खोजने माघ मेले में पहुंचे मां-बाप

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प्रयागराज (राजेश सिंह)। संगम की रेती पर फैले माघ मेले की भीड़ में उस दिन आस्था के साथदृसाथ एक असहनीय पीड़ा भी बह रही थी। आगरा से आए एक दंपती के हाथ में बेटे की तस्वीर थी। उसी तस्वीर को सीने से लगाए वे हर चेहरे में अपने लाल को खोज रहे थे।

संगम की रेती पर फैले माघ मेले की भीड़ में उस दिन आस्था के साथदृसाथ एक असहनीय पीड़ा भी बह रही थी। आगरा से आए एक दंपती के हाथ में बेटे की तस्वीर थी। उसी तस्वीर को सीने से लगाए वे हर चेहरे में अपने लाल को खोज रहे थे। कोई अनजान मिलता तो आंखों में उतर आई उम्मीद के साथ वे पूछ बैठते, भइया, क्या आपने इस लड़के को कहीं देखा है। भीड़ के शोर में उनकी आवाज़ कई बार दब जाती, पर सवाल हर बार वही रहता।

आगरा के ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र के रामबाग से आए राजीव कुशवाहा और उनकी पत्नी पूनम अपने बेटे शिव कुशवाहा की फोटो लेकर पूरे माघ मेले में घूम रहे हैं। संगम नोज से लेकर अक्षय वट, हनुमान मंदिर, राम घाट लेकर महावीर रोड और संगम के सभी घाटों पर जा रहे हैं। वह लोगों को फोटो दिखाकर पूछ रहे हैं कि इस लड़के को कहीं देखा है। दंपती के मुताबिक उनका इकलौता बेटा शिव कुशवाहा 24 जून 2025 से लापता हो गया है। 

बताया कि जहां भी उम्मीद की एक किरण दिखी, वहां पहुंचे। पोस्टर छपवाए, फोन किए, अनजान नंबरों पर भरोसा किया, पर हर कोशिश निराशा में बदलती चली गई। वक्त के साथ आंखों की नमी सूखने लगी, पर इंतजार खत्म नहीं हुआ। माघ मेले की खबर सुनकर उनके भीतर एक नई आस जागी। लाखों श्रद्धालु आते हैं, कहीं न कहीं किसी की नजर पड़ ही जाएगी। यही सोचकर वे संगम तट पर पहुंच गए। संगम की ओर बढ़ती भीड़ के बीच वे रुक-रुक कर तस्वीर दिखाते, लोगों से पूछते, और हर नहीं पर मन को समझाते। अगले मोड़ पर शायद हां मिल जाए।

दंपती की आंखों में आंसुओं का सैलाब था। मां की हथेलियां कांपतीं तो पिता चुपचाप बेटे की तस्वीर को सीधा करते मानो वह कहीं से देख रहा हो और तस्वीर टेढ़ी न लगे। वे कहते हैं, आंखें पथरा गई हैं, पर उम्मीद जिंदा है। जब तक सांस है, तलाश जारी रहेगी। उनके लिए जीवन का एकमात्र उद्देश्य अब वही है। बेटे को खोज निकालना। 

मेले की चहल-पहल के बीच उनकी कहानी कई दिलों को छू गई। कुछ लोगों ने तस्वीर अपने फोन में ली, कुछ ने सोशल मीडिया पर साझा करने का भरोसा दिया, किसी ने पुलिस हेल्पडेस्क का रास्ता दिखाया। हर छोटी मदद उनके लिए बड़ा सहारा बनती गई। शाम ढलतेदृढलते थकान चेहरे पर थी, मगर कदम रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मां पूनम ने बताया कि उन्होंने गंगा मैया से बेटे के लिए मनौती मांगी है। बेटा मिल जाएगा तो उसके साथ वह फिर मां गंगा में स्नान करने के लिए आएंगे। 

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