मथुरा और हरिद्वार पीठ की संतों ने दिया पूर्ण समर्थन
प्रयागराज (राजेश सिंह)। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के धरने का विवाद पांच दिनों से जारी है। इस मामले में जहां प्रशासन और कोर्ट ने उनसे शंकराचार्य होने का सबूत मांगा है और डबल नोटिस चस्पा किए हैं, वहीं अब उन्हें राजनीतिक दलों और विभिन्न संतों का समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में मथुरा और हरिद्वार पीठ की महिला शंकराचार्यों ने भी अविमुक्तेश्वरानंद को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को अनुचित बताया है। शंकराचार्य पीठाधीश्वर डॉ. अनंत ज्योति सरस्वती महाराज, जो कैवल्य महिला अखाड़ा की अध्यक्ष हैं, ने कहा कि यह एक बहुत छोटा सा मुद्दा था, जो पर्व के समय स्नान से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन स्नान की व्यवस्था कर देता तो यह विवाद उत्पन्न ही नहीं होता।
डॉ. अनंत ज्योति सरस्वती ने आगे कहा कि शंकराचार्य अपने भक्तों के साथ स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन उनकी मदद करने के बजाय उन पर श्आक्रमणश् करना उचित नहीं है। उन्होंने इस स्नान के मुद्दे को अन्य मुद्दों से जोड़ने पर प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाया और कहा कि इस माहौल में तीनों शंकराचार्यों को अविमुक्तेश्वरानंद के साथ खड़ा होना चाहिए।
श्री श्री 1008 आचार्य मां जागृत चेतना शक्तिपीठ, हरिद्वार, उत्तराखंड ने इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि शंकराचार्य पद गुरु परंपरा से प्राप्त होता है, जहां गुरु ही अपने शिष्यों को अभिषिक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि चार मठ और चार पीठ पर स्थापित परंपरा चली आ रही है। उन्होंने उत्तर मठ के रूप में अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया।
श्री श्री 1008 कृष्ण माता आचार्य महामंडलेश्वर, गायत्री त्रिवेणी पीठ, मथुरा ने कोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को मानने वाले कोर्ट या प्रशासन नहीं होते, बल्कि यह गुरु परंपरा का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोर्ट और प्रशासन का अधिकार क्षेत्र नहीं है और सभी संत अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं।
